18 गांव पूरी तरह ‘टोल फ्री’:विधायक की मौजूदगी में बनी सहमति, धरना उठाया, टोल शुरू, 20 किमी दायरे में 250 रुपए का मासिक पास

पिछले पांच दिनों से धनुरी टोल प्लाजा पर जारी गतिरोध को प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच हुई मैराथन वार्ता के बाद समाप्त हो गया। मंडावा विधायक रीटा चौधरी की मध्यस्थता में चली इस बैठक में स्थानीय ग्रामीणों की मांगों को स्वीकार कर लिया गया, जिसके बाद आंदोलनकारियों ने धरना उठा लिया और टोल बूथ पर फिर से आवाजाही सुचारू हो गई। किसे मिली राहत, क्या हुआ तय?
प्रशासनिक अधिकारियों और संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते के तहत कई बड़े निर्णय लिए गए हैं। 18 गांव हुए टोल मुक्त: सोनासर, पीपल का बास, कालेरा का बास, लूणा, अम्बेडकर नगर, सहारण की ढाणी, धनुरी, नया बास, कयाम्सर, लादूसर, राहड़ों की ढाणी, बासड़ी, चैनपुरा, शोभा का बास, रामपुरा, कायमपुरा, फ्रांस का बास और कांट गांव के वाहनों को अब इस टोल से गुजरने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। 20 किमी के दायरे में मासिक पास: टोल से 20 किलोमीटर की परिधि में आने वाले अन्य गांवों के निजी वाहन मालिकों के लिए राहत दी गई है। अब मात्र 250 रुपये में मासिक पास बनवाकर वे असीमित बार यात्रा कर सकेंगे। सड़क सुधार का वादा: पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क की कमियों को दूर करने और खतरनाक ‘ब्लैक स्पॉट्स’ को चिह्नित कर उन्हें सुधारने का आश्वासन दिया है। विवाद की नई चिंगारी: ‘चयनित’ राहत पर उठे सवाल भले ही धरना समाप्त हो गया हो, लेकिन टोल फ्री किए गए गांवों की सूची ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
हरिपुरा और बाजला को किया नजरअंदाज: टोल से महज 6 किमी दूर ‘बाजला’ को फ्री नहीं किया गया, जबकि 12 किमी दूर ‘कांट’ को फ्री कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि कांट जाने के लिए हरिपुरा से गुजरना पड़ता है, फिर भी हरिपुरा को सूची से बाहर रखा गया है। अलसीसर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नाराजगी: अलसीसर को राहत नहीं मिलने पर सरपंच हारून भाटी ने विरोध जताया है। वहीं, आंदोलन के शुरुआती चेहरा रहे पूर्व प्रधान घासीराम पूनिया ने वार्ता में न बुलाए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
पुलिसिया कार्रवाई पर भड़कीं विधायक समझौते के बीच मंडावा विधायक रीटा चौधरी का रुख धनुरी थाना पुलिस के प्रति बेहद सख्त नजर आया। विधायक ने धरने पर पहुंचकर पुलिस कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा की। विधायक चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार सबको है। बिना एसपी की जानकारी के एसएचओ ने जिस तरह प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, वह निंदनीय है। हम इस व्यवहार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएंगे और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। यदि एक्शन नहीं हुआ, तो दोबारा बड़ा आंदोलन होगा। समिति ने जताया आभार संघर्ष समिति के प्रतिनिधि महिपाल पूनिया, अरविंद गढ़वाल और अजीत मेघवाल ने इस समझौते को जनता की एकता की जीत बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को आखिरकार ग्रामीणों की वाजिब मांगों के आगे झुकना पड़ा। वार्ता के दौरान एसडीएम सुमन चौधरी, सीओ हरिसिंह धायल, धनुरी एसएचओ संजय गौतम सहित पीडब्ल्यूडी और टोल ऑपरेटरों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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