2 महीने पहले बेटे की मौत, अब पति ने दम-तोड़ा:LPG ब्लास्ट में 60% झुलसा था बंशीलाल; मृतक की पत्नी ने हादसे से अब तक नहीं बदले कपड़े

जयपुर LPG टैंकर ब्लास्ट में गंभीर रूप से झुलसी युवती सहित 3 और लोगों ने बुधवार को सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया। इसी के साथ पिछले चार दिन में मरने वालों की संख्या 18 हो गई है।जयपुर-अजमेर हाईवे पर 20 दिसंबर की सुबह करीब पौने छह बजे हादसा हुआ था। बुधवार सुबह करीब 4 बजे विजिता (22) निवासी प्रतापगढ़ (राजस्थान) और सुबह करीब साढ़े नौ बजे विजेंद्र (36) निवासी भुरीबड़ाज, पावटा (जयपुर) ने दम तोड़ दिया। इसके बाद दोपहर एक बजे के आसपास आसींद, भीलवाड़ा निवासी घायल बंशीलाल (35) की भी मौत हो गई। एसएमएस मोर्चरी के बाहर LPG ब्लास्ट मामले में मृतक के शव के साथ उनकी पत्नी टम्मू देवी और भतीजा देवकरण एसएमएस मोर्चरी के पास पहुंचे। जिन्होंने आज भी वहीं कपड़े पहने हुए थे जो हादसे के दिन एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचने के दौरान पहने थे। मृतक की पत्नी इस दौरान सिसकती नजर आई। उसने अपना पूरा चेहरा घूंघट से ढका हुआ था। वह इस स्थिति में भी नहीं थी कि पति से जुड़ी यादें या कुछ भी बता पाए। ऐसे में भास्कर संवाददाता ने हादसे में मृतक बंशीलाल के भतीजे देवकरण से बातचीत की तो उसने बताया- कि उनकी पत्नी ने अब तक भी घटना दिन से कुछ खाया नहीं है। उन्होंने बताया- कि मृतक बंशीलाल रात 12 बजे तक ठीक थे, लेकिन उसके बाद उनके सांस चढ़ने लगी, साढ़े चार बजे वैंटिलेटर पर चढ़ाया। फिर भी हमें उम्मीद थी कि वह ठीक हो जाएंगे। उन्होंने बताया- बंशीलाल की पत्नी पर दोहरा दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 2 महीनें पहले ही मृतक बंशीलाल के बेटे अनिल (18) की बिमारी के कारण मौत हो गई। मां अभी बेटे की मौत के दर्द को भुला भी नहीं पाई थी कि अब पति का साथ भी छुट गया। उन्होंने बताया कि बंशीलाल की पत्नी और उनकी एक बेटी ज्योति (15) परिवार में बचे है। बंशी लाल ट्रक ड्राइवर था। वहीं इससे पहले हादसे में दम तोड़ चुके मृतक विजेंद्र के भाई रत्नलाल और पिता जगदीश प्रसाद और मामा शोराम धानका भी एसएमएस मोर्चरी पर एक कोने में खड़े नजर आए। मृतक विजेंद्र के भाई ने बताया- हमें उम्मीद थी कि विजेंद्र इस हादसे में 60प्रतिशत झुलसने के बाद भी ठीक हो जाएगा। उनके पिता ने बताया- मेरा बेटा पेशे से ड्रावर था। उसके तीन बच्चे है, जिनमें 2 लड़की और एक लड़की है। पूरी परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी विजेंद्र ही उठा रहा था। विजेंद्र मिलनसार स्वभाव का व्यक्ति था उसकी मृत्यु से परिवार की रीढ़ की हड्डी टूट गई है।

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