2 लोगों को 100 करोड़ रुपए बांट दिया मुआवजा:गांव की 10 एकड़ जमीन को शहरी बताकर हड़प ली राशि, अब रिकवरी होगी

जांच में 10 अफसरों-कर्मचारियों को दोषी माना, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं, 4 तो रिटायर भी हो चुके रावघाट रेल परियोजना में भी मुआवजा घोटाला हुआ है। वह भी ऐसा कि गांव की जमीन को शहरी बताकर सिर्फ दो लोगों को लगभग 100 करोड़ रुपए बांट दिए गए। इस मामले में जांच हुई। 2019 में कोर्ट का आदेश भी आया। डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर सहित कुल 10 अफसर-कर्मचारी दोषी माने गए, लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। भास्कर की पड़ताल में ये बात सामने आई कि उसमें से 4 तो अब रिटायर हो चुके हैं। एक की मौत भी हो चुकी है। मामला जगदलपुर तहसील के पल्ली गांव का है। दो लोगों को 4.18 हेक्टेयर जमीन के लिए लगभग 100 करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में दिए गए थे। इनमें बली नागवंशी को जमीन के कारोबार से जुड़ा बताया गया है, जबकि दूसरी हितग्राही नीलिमा बेलसरिया कांग्रेस नेता टीवी रवि की पत्नी बताई गई है। दरअसल जगदलपुर से रावघाट तक बिछाई जाने वाली रेल लाइन बस्तर रेलवे प्राइवेट लिमिटेड, एनएमडीसी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है। इसके लिए जगदलपुर तहसील के चार गांव पल्ली, अघनपुर, घाटपदमुर और कंगोली के 108 खातेदारों की 28 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण रेलवे द्वारा किया गया था। इसके एवज में 152.8 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था। आश्चर्य की बात यह है कि पल्ली गांव में बली नागवंशी और नीलिमा बेलसरिया पति टीवी रवि को 4.18 हेक्टेयर यानी 10 एकड़ जमीन के बदले 99 करोड़ का मुआवजा दिया गया। शेष 101 खातेदारों को उनकी 24 हेक्टेयर जमीन के बदले मात्र 53.51 करोड़ रुपए का मुआवजा मिला। दो खातेदारों को दिया 99 करोड़ जबकि शेष 21 को 53 करोड़ का भुगतान: जगदलपुर ब्लॉक के कंगोली, अघनपुर, घाटपदमूर और पल्ली के 108 खाताधारकों की जमीन रेललाइन और स्टेशन के लिए ली गई थी। नगर निगम क्षेत्र में शामिल कंगोली में सबसे ज्यादा 46.66 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। इस एवज में मात्र 36.52 करोड़ का मुआवजा दिया गया है। जबकि पल्ली में सिर्फ 7 खातेदारों की 4.184 हेक्टेयर भूमि लेकर 99.07 करोड़ का मुआवजा दिया गया। इसमें भी सिर्फ दो लोगों को ही 95.82 करोड़ रुपए दिए गए हैं। अन्य 5 लोगों को 3.25 करोड़ रुपए और शेष 3 गांव के 101 लोगों को 53.51 करोड़ रुपए का मुआवजा मिला है। मामले की शिकायत के बाद कलेक्टर डॉ. अय्याज तंबोली ने एसडीएम, एसएलआर और दरभा के तहसीलदार की तीन सदस्यीय समिति से जांच करवाई थी। जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट कमिश्नर सहित सामान्य प्रशासन और पुलिस को भेजी गई थी। कलेक्टर ने मांगी थाने से जानकारी केंद्र सरकार से राशि मंजूर होती ही जिला प्रशासन भी एक्टिव हो गया। पिछले महीने जगदलपुर कलेक्टर की ओर से कोतवाली थाने को चिट्ठी जारी कर दोषी अफसरों तथा अन्य लोगों की जानकारी मांगी गई। कोतवाली पुलिस की ओर से कहा गया है कि इस मामले में अभियोग पत्र तैयार करने में एक माह का समय लगने की संभावना है। हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई : हाईकोर्ट ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि आरोपियों से मुआवजा राशि जमा करवाकर नए सिरे से मुआवजा गणना की जाए और सही मुआवजा वितरण किया जाए। इसके बाद बस्तर कलेक्टर ने बली नागवंशी और नीलिमा बेलसरिया को नोटिस जारी करके कलेक्टर बस्तर के बैंक एकाउंट में 15 दिनों के भीतर मुआवजे के करीब 100 करोड़ रुपए जमा करने के आदेश जारी किए थे। ​इसके बाद आरोपी फिर कोर्ट गए, जहां उन्हें छह हफ्ते का समय दिया गया था। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी 2022 को आरोपियों द्वारा लिया गया पैसा वापस करने तथा फिर से मुआवजे की दर निर्धारित कर उन्हें पैसे देने का निर्णय दिया था। एसआईटी जांच से हुआ घोटाले का खुलासा: तत्कालीन कलेक्टर अय्याज तंबोली ने एसआईटी गठित कर जांच करवाई। तत्कालीन कलेक्टर ने बली नागवंशी, नीलिमा बेलसरिया, एसडीएम और सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर सियाराम कुर्रे, डिप्टी कलेक्टर मंडावी, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक और वर्तमान में नायब तहसीलदार अर्जुन श्रीवास्तव तथा पटवारी धर्म नारायण साहू सहित 10 पर FIR का आदेश दिया गया था। सभी आरोपियों ने बिलासपुर हाई कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। इस पर पहले सिंगल बेंच और फिर बाद में डबल बेंच ने भी आरोपियों के आवेदन खारिज कर दिए ​​थे। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक प्रक्रिया में है
इस मामले में कोर्ट द्वारा किसी भी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी। इस मामले में कोर्ट के निर्देश के मुताबिक ही प्रक्रिया की जा रही है।
शलभ सिन्हा, पुलिस अधीक्षक, जगदलपुर सड़क के एक ओर की जमीन शहरी, दूसरी साइड को ग्रामीण बताया, अलाइनमेंट बदलवाया जांच में पाया गया कि चित्रकोट मुख्य सड़क के एक ओर पल्ली की जमीन को शहरी और निगम इलाके का बताकर मुआवजे की गणना की गई। इसमें सिर्फ दो भूमि स्वामियों को ही लाभ पहुंचाया गया। जबकि सड़क के दूसरी ओर घाट पदमूर के इलाके को ग्रामीण माना गया। बस्तर रेलवे कंपनी ने जगदलपुर तहसील के पल्ली में रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव रखा। इस गांव में दोनों भूमि स्वामी बली नागवंशी और नीलिमा टीवी रवि की जमीन है। आरोप है कि दोनों जमीन मालिकों ने कंपनी के अफसरों से मिलीभगत कर रेल लाइन के अलाइमेंट को बदलवा दिया।

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