गुरमीत लूथरा | अमृतसर सरकार ने नई पॉलिसी लाकर औद्योगिक प्लॉटों को आपस में मिलाने या अलग करने की प्रक्रिया को आसान कर दिया है। कैबिनेट मीटिंग में एक नई, सरल और पारदर्शी पॉलिसी को हरी झंडी दे दी है। इसका मकसद पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन के तहत आने वाले प्लॉटों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना है, ताकि राज्य में औद्योगिक विकास को रफ्तार मिल सके और जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो। नई पॉलिसी पीएसआईईसी के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी साथ-साथ लगे प्लॉटों पर लागू होगी। इसमें वे प्लॉट भी शामिल हैं, जो पहले पीआईसीटीसी, उद्योग निदेशालय और पीएसआईडीसी के थे और अब पीएसआईईसी को सौंप दिए गए हैं। नई पॉलिसी शेड या बूथ पर लागू नहीं होगी। फोकल प्वाइंट इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसो. के प्रधान संदीप खोलसा ने बताया किया कि पहले सरकार के स्माल स्केल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कारपोरेशन (पीएसआईईसी) द्वारा फोकल प्वाइंट के खाली प्लाटों की नीलामी करवाने के नतीजन कारोबारी को दोगुनी कीमत पर प्लाट खरीदना पड़ता था, मगर अब सरकारी कंट्रोल रेटों पर आधे रेट पर कारोबारी प्लाट खरीद सकेंगे। गुरुनगरी के फोकल प्वाइंट्स की बात करें तो अलॉटमेंट में नीलामी के तहत रिजर्व प्राइस के तहत करीब 20 हजार प्रति गज प्लाट खरीददार को हासिल होता था जबकि अब उक्त प्लाट कंट्रोल रेट के तहत 10 हजार प्रति गज के तहत मिल सकेगा यानि कारोबारी को 50 प्रतिशत का फायदा होगा। भारतीय व्यापार मंडल के प्रदेश प्रधान राजीव अनेजा ने बताया कि नई नीति के तहत कारोबारियंों को नीलामी के तहत होने वाले झंझटों से छुटकारा मिलेगा। अगर पहले से कोई औद्योगिक यूनिट कारोबारी चला रहा है और यूनिट के साथ सटे प्लाट की खरीद करना चाहता है तो उसे प्लाट की खरीद करने में प्राथमिकता हासिल होगी। सरकार अन्य कारोबारियों की बजाय उक्त यूनिट वाले कारोबारी को प्राथमिकता के आधार पर अधिक से अधिक दस्तावेजों की औपचारिकताओं के झंझटों के बिना ही प्लाट अलॉट कर सकेगी। उन्होंने कहा कि इस नीति से जहां सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा वहीं कारोबारियों के कारोबार में भी इजाफा होगा। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय उपप्रधान रंजन अग्रवाल ने कहा कि सरकार को प्लॉट को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को सरल करना चाहिए। कारोबारी सारी औपरचारिकता पूरी कर प्लॉट तो खरीद लेता है, अलॉटमेंट प्रक्रिया भी पूरी कर देता है मगर विभागीय औपचारिकताओं की जटिलताओं के चलते प्लॉट 2-2 साल तक प्लाट व्यापारी के नाम ट्रांसफर नहीं हो पाता है।


