गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के इन्दागांव में 3500 से ज्यादा आबादी है। इस गांव में 20 दिनों में 11 लोगों ने सुसाइड का प्रयास किया। 3 की मौत हो गई, बाकी को बचा लिया गया। ये घटनाएं 3 मार्च से 21 मार्च के बीच हुई। मामला सामने आने के बाद मैनपुर SDM, SDOP और BMO ने गांव में शिविर लगा कर काउंसिलिंग की। अब तक 15 लोगों को सुसाइड करने से बचाया गया है। CMHO गार्गी यदु ने कहा कि मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों का दल प्राथमिक काउंसिलिंग करके आई है। सोमवार को टीम दोबारा जाएगी। आत्महत्या का प्रयास करने वालों की काउंसिल करने के अलावा वहां के हालातों का भी जायजा लिया जाएगा। सोमवार के बाद ही सटीक कारणों को बताया जा सकेगा। गांव में शांति के लिए कर रहे पूजा-अर्चना दैनिक भास्कर की टीम गांव पहुंच वजह जानने की कोशिश की। सुबह 9 बजे गांव के सरपंच, पंच, कोटवार ,पटेल ,पुजारी से लेकर 100 से ज्यादा ग्राम प्रमुख माता देवालय के पास मौजूद थे।जो ग्राम देवी को आह्वान कर गांव में शांति की कामना के लिए पूजा कर रहे थे। ग्राम पुजारी सुंदर ने बताया कि लगातार हो रहे मामले से गांव में भय व्याप्त है ,आत्महत्या के प्रयास थमने का नाम नहीं ले रहा। ग्रामीणों की इच्छा अनुरूप शांति के लिए देवी का आह्वान पूजन किए। कृषि योजनाओं के लाभ से 400 से ज्यादा वंचित गांव की आबादी 3500 से ज्यादा है, 600 से ज्यादा कृषक है। जीविकोपार्जन के लिए कृषि और वनोपज ही एक मात्र साधन है। हैरानी की बात है कि इस गांव के केवल 240 कृषकों के 112 हेक्टेयर भूमि का ही पंजीयन है। 400 किसानों के 382 हेक्टेयर कृषि भूमि का जिक्र राजस्व रिकॉर्ड में नहीं है। पीड़ित किसान मन्नू राम महाकुर ने बताया कि 13 एकड़ कृषि भूमि है। पिछले 4 पीढ़ी से परिवार कृषि कार्य करते आ रहे हैं, लेकिन उसके भूमि का अब तक पट्टा नहीं बना। भास्कर चक्रधारी की भी यही पीड़ा थी। हर दूसरा किसान पट्टा की समस्या से जूझ रहा है। किसान लगातार तहसील,कलेक्टर से लेकर कमिश्नरी का चक्कर काट रहे हैं। कई बार उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन घास भूमि में दर्ज उनके काबिज भूमि का कृषि पट्टा नहीं मिला। कृषक अपनी उपज व्यापारी को बेचते हैं। उन्हें खाद बीज लोन की सुविधा नहीं मिलती। 280 हायर सेकेंडरी पास बेरोजगार ग्राम के सरपंच प्रतिनिधि केसरी ध्रुव, पूर्व उपसरपंच रूप सिंह बस्तिया ने बताया कि गांव में 12वीं पास बेरोजगार की संख्या 280 है। इनमें से आधे आंध्र मजदूरी करके लौट चुके हैं। कुछ आज भी मजदूरी करते हैं। आत्महत्या का प्रयास करने वाले ज्यादातर विवाहित बेरोजगार हैं। कुछ सहपाठी और अपने दोस्तों के मौत के बाद सुसाइड की कोशिश किए हैं। मौत या मौत के प्रयास का प्रमुख वजह बेराजगारी भी है। हाथ में काम नहीं होने से युवक नशा का रास्ता भी अपना रहे हैं। काम होता तो शारीरिक और मानसिक रूप से व्यस्त रहते, लेकिन यहां काम का अभाव है। प्रशासन से ग्रामीण नाराज प्रशासनिक दौरे के बाद अफसर अभी आश्वस्त कर रहे हैं, जिस पर ग्रामीण भरोसा नहीं कर रहे। वजह पूछने पर नन्हे सिंह,रूपसिंह,केशरी आदि ने बताया कि उप तहसील खोला गया, लेकिन कभी-कभी ही अफसर आकर बैठते हैं। सहकारी बैंक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वीकृति के बाद भी नहीं खोला गया। नल-जल योजना से आधा अधूरा ग्रामीणों तक पानी पहुंच रहा है। भुजिया पारा में पेयजल का संकट है। मिडिल स्कूल में शिक्षक की कमी, भवन विहीन आंगनबाड़ी केंद्र संचालन के अलावा प्री-मीट्रिक कन्या छात्रावास का मांग पर ध्यान नहीं दिया जाना, ग्रामीणों की नाराजगी की बड़ी वजह है।


