छत्तीसगढ़ के धमतरी में स्थित बिलाई माता मंदिर की 200 वर्ष पुरानी पवित्र बावली को 36 साल बाद फिर से खोला गया है। सनातन धर्म में तीर्थ के रूप में मान्यता प्राप्त इस बावली की अब विशेष सफाई की जा रही है। इस बावली को मंदिर के नवीनीकरण के दौरान बंद कर दिया गया था, लेकिन अब इसे फिर से उसकी पुरानी गरिमा के साथ सुसज्जित किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन की कड़ी निगरानी में चल रहे सफाई अभियान के बाद बावली को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए तैयार किया जाएगा। यह बावली मंदिर की आस्था का विशेष केंद्र है, क्योंकि मंदिर के ज्योति कलश का विसर्जन ब्रह्म मुहूर्त में इसी बावली में किया जाता है। इस ऐतिहासिक बावली को नए स्वरूप में श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। सफाई के बाद बावली की साज-सज्जा की जाएगी, जिससे भक्तगण इसके दर्शन कर सकें। बावली में ज्योति कलश का विसर्जन यही वह स्थान है जहां ज्योति कलश को नवरात्रि के समापन पर विसर्जित किया जाता है। यह बावली लगभग 30 फीट गहरी है और इसके भीतर की सीढ़ियां अब धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही हैं। मंदिर समिति की देखरेख में मजदूरों द्वारा रोजाना सफाई और सजावट का कार्य किया जा रहा है। इन दिनों मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण कार्य भी जोरों पर है। करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से मंदिर को भव्य रूप दिया जा रहा है। देवी मां के लिए स्वर्ण मुकुट, स्वर्ण कलश और स्वर्ण जड़ित छत्र भी तैयार किए जा रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष आनंद पवार ने जानकारी दी कि ट्रस्ट द्वारा मां के आशीर्वाद से यह निर्णय लिया गया कि अब बावली को फिर से धार्मिक उपयोग में लाया जाएगा। श्रद्धालुओं को वितरित किया जाता था बावली का जल पंडित नारायण प्रसाद दुबे बताते हैं कि यह बावली सीढ़ीनुमा संरचना है, जैसा कि पुराने मंदिरों में देखा जाता था। प्राचीन काल में इसी बावली के जल से बच्चों का स्नान कराया जाता और शेष जल को चरणामृत के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता था। मां बिलाई माता को स्वयंभू देवी माना जाता है, और उनके ज्योत-जवारा का विसर्जन किसी नदी या तालाब में नहीं, बल्कि मंदिर परिसर की बावली में मंत्रोच्चार के साथ किया जाता है। हर वर्ष चैत्र और कुंवर नवरात्रि के दौरान दूर-दूर से भक्तजन यहां पहुंचते हैं। देश ही नहीं, विदेशों से भी श्रद्धालु यहां ज्योति कलश प्रज्वलित करवाने आते हैं। अब बावली के पुनर्जीवन के साथ श्रद्धालुओं को एक और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा।


