हनुमानगढ़ में गोलूवाला स्थित गुरुद्वारा महताबगढ़ साहिब विवाद को लेकर शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें विभिन्न सिख जत्थेबंदियों के प्रतिनिधियों के साथ 22 निहंग सिख भी शामिल हुए, जो गोलूवाला प्रकरण में आरोपी थे और हाल ही में साढ़े तीन महीने जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए हैं। निहंग सिखों ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें एक राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। निहंग सिखों के अनुसार उन्हें गुरुद्वारे में बेअदबी की सूचना मिली थी, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे। उनका दावा है कि उनके पहुंचने से पहले ही कुछ लोगों ने वहां तोड़फोड़ की थी, जिसका आरोप बाद में उन पर लगा दिया गया। सिख जत्थेबंदियों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि गुरुद्वारे में हुई तोड़फोड़, मारपीट और लूटपाट की घटनाओं में अन्य नामजद लोग शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक राजनीतिक साजिश थी, जिसका उद्देश्य समुदायों के बीच तनाव पैदा करना था। सिख धर्म प्रचार कमेटी के चेयरमैन तेजेंद्रपाल सिंह टिम्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हनुमानगढ़ में सिख और हिंदू समुदायों के बीच सौहार्द बिगाड़ने और तनाव पैदा करने की साजिश रची गई थी। उन्होंने सादुलशहर विधायक गुरवीर बराड़ पर इस पूरे प्रकरण में शामिल होने का आरोप लगाया। टिम्मा ने भाजपा से विधायक गुरवीर बराड़ को बर्खास्त करने और उनकी भूमिका की जांच की मांग की। कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पहले ही पुलिस अधीक्षक (एसपी) से की जा चुकी है। उन्होंने गुरुद्वारे में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी दोहराई, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। जत्थेबंदियों ने सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक दोषियों को सामने लाने की मांग की। इस प्रेस वार्ता में बाबा राज सिंह खालसा, बाबा निशान सिंह, सूंदर सिंह, शिवचरण सिंह, बीबी हरमीत कौर सहित कई सिख संगत सदस्य उपस्थित थे।


