2200 साल पुराने ‘सागर महादेव’

फतहलाल शर्मा | भीलवाड़ा भीलवाड़ा प्राचीनतम जनबसावट का क्षेत्र है। यहां आगूंचा तालाब किनारे सागर महादेव शिवलिंग करीब 2200 वर्ष पुराना माना गया है। विशेषज्ञ इसे प्री-कुषाणकाल (100 बीसी) का मानव निर्मित शिवलिंग बताते हैं, जो देश के प्राचीनतम शिवलिंगों में गिना जाता है। रायपुर क्षेत्र के नांदसा में मिले 1800 साल पुराने यूप स्तंभ और पातलियास में 40 हजार वर्ष पुराने पत्थर के औजारों ने भी क्षेत्र की ऐतिहासिक महत्ता सिद्ध की है। जलधारा विकास संस्थान के अध्यक्ष महेश नवहाल के अनुसार आगूंचा प्री-हिस्टोरिक साइट रही है। मानसी नदी के पास और खारी नदी के समीप बसे इस क्षेत्र में प्राचीनकाल से बसावट के प्रमाण मिले हैं। 1967 के शोध में यहां गहरे गड्ढे मिले, जिनमें 120 फीट नीचे लकड़ी के तख्ते व्यवस्थित रूप से मिट्टी रोकने के लिए लगाए गए थे। कार्बन डेटिंग में ये तख्ते भी करीब 2200 वर्ष पुराने पाए गए। 1991 में यहां जिंक खनन शुरू हुआ, जिससे क्षेत्र की पुरातात्विक महत्ता और उजागर हुई। आगूंचा के कमलकिशोर नगला बताते हैं कि गांव के गणेशलाल असावा को तालाब किनारे स्वप्न में शिव प्रतिमा होने का संकेत मिला। खुदाई में शिवलिंग प्रकट हुआ और निर्देश मिला कि गांव खुशहाल होने तक छत न बने। बरगद गिरने व चबूतरा टूटने के बाद परिवार ने सेवा जारी रखी। बाद में मंदिर निर्माण हुआ, जिसे ग्रामीण द्वारपाल मानते हैं। इधर University of Oxford के शोध में क्षेत्र में चांदी खनन के प्रमाण मिले। बताया गया कि चांदी चंद्रगुप्त मौर्य व चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र भेजी जाती थी। राजस्थान यूनिवर्सिटी के आर्कियोलॉजी प्रोफेसर तमेघ पंवार का कहना है कि यह शिवलिंग दक्षिण भारत के गुड्डीमल्लम शिवलिंग की तर्ज पर हो सकता है, जिसके नीचे मानव स्वरूप की आकृति मिलती है। उनके अनुसार यह स्थल शैव मतावलंबियों का प्रमुख केंद्र रहा होगा। डेक्कन कॉलेज, पुणे के सहायक आचार्य गोपाल जोगी ने इसे भारत के प्राचीनतम शिवलिंगों में एक बताया। उनका कहना है कि आसपास खुदाई से मानव बसावट और प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिल सकते हैं। पुरा अन्वेषी ओमप्रकाश कुकी ने इसके संरक्षण की मांग की। फोटो: सुखदेव गाडरी स्वप्न से प्रकट हुए थे ‘सागर महादेव’

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *