दिल्ली, कर्नाटक, तमिलनाडु की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी जल बोर्ड बनाने की तैयारी है। नगरीय प्रशासन विभाग ने इसका मसौदा बनाकर वित्त विभाग को भेज दिया है। 24 फरवरी को पेश होने जा रहे राज्य के बजट में इसकी घोषणा हो सकती है। यह बोर्ड विजन 2047 को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है। शुरुआत में इस बोर्ड को 14 नगर निगम क्षेत्रों का जिम्मा मिलेगा। इसके बाद बड़ी नगर पालिकाओं को भी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में लाया जाएगा। बोर्ड का मुख्य काम शहर में शुद्ध जल को घर-घर तक पहुंचाना और सीवरेज का प्रबंधन करना होगा। इसके अलावा बजट में दूसरी बड़ी घोषणा रायपुर को लेकर भी हो सकती है। दिल्ली, मुंबई, भोपाल, हैदराबाद जैसे मेट्रो शहरों की तर्ज पर रायपुर भी प्रदेश की राजधानी की तरह नजर आए उसके लिए मुख्यमंत्री राजधानी विकास योजना बनाई गई है। बजट में पहले साल में करीब एक हजार करोड़ रुपए का प्रावधान इस योजना के तहत किए जाने के आसार हैं। राजधानी में होने वाले सभी विकास कार्य इसी योजना के तले होंगे। लगेंगे जल मीटर, कर वसूलेगा बोर्ड नगरीय प्रशासन विभाग ने जल बोर्ड के मसौदे में अधिकारों का भी विवरण रखा गया है। केंद्र और राज्य की शहरों में चलने वाली पानी और सीवरेज से जुड़ी सभी योजनाओं का क्रियान्वयन बोर्ड को ही करना होगा। इसके अलावा हर घर में वाटर मीटर लगाए जाएंगे। जल कर को बोर्ड ही तय करेगा और वसूलेगा। शहरों में स्वच्छ भारत मिशन और अमृत जैसी योजनाएं बोर्ड के अधीन होंगी। 2028 तक बोर्ड पूरी तरह से मैदान में उतर जाएगा। बोर्ड बनने के तीन साल का लक्ष्य होगा कि पानी के लीकेज और चोरी को पूरी तरह खत्म करें। 5 साल में बदलेगी रायपुर की सूरत
‘मुख्यमंत्री राजधानी विकास योजना’ के तहत रायपुर को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है, ताकि वह दिल्ली, मुंबई, भोपाल और हैदराबाद की तरह ‘राजधानी का स्वरूप’ प्राप्त करे। इसमें पीडब्ल्यूडी, नगरीय प्रशासन, जल संसाधन, परिवहन, पर्यटन जैसे विभागों को सभी बड़ी परियोजनाएं इसके तले ही क्रियान्वित होगी। इसके तहत सड़कें, फ्लाईओवर, बड़े भवन, वर्किंग वूमेन हॉस्टल, रिवर व्यू, बड़े उद्यान तैयार होंगे। ट्रैफिक कंट्रोल पर भी काम होगा। शारदा चौक से तात्यापारा चौड़ीकरण जैसे मामलों का अब समाधान होने की उम्मीद बढ़ जाएगी। पहली बार बनेगा जल चक्र
प्रदेश में पहली बार जल चक्र बनाने की तैयारी है। यानी पानी की सप्लाई से लेकर उसके ट्रीटमेंट कर उसे दोबारा उपयोग में लाने तक के चक्र को बोर्ड तैयार करेगा। इसके अलावा यह काम होंगे- जलापूर्ति और सीवरेज का अलग से मास्टर प्लान बनेगा। वाटर व सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का नियमित ऑडिट होगा।
परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करने से लेकर सर्वे और तकनीकी जांच के अधिकार बोर्ड के पास होंगे।
हर साल 500 इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। {पांचों संभाग के लिए मैनेजमेंट यूनिट बनाई जाएगी।
रियल टाइम निगरानी के लिए हाईटेक डिजिटल सिस्टम तैयार होगा।
सीवरेज बिना ट्रीटमेंट के नदियों में नहीं जाएगा, एआई मॉनिटरिंग की जाएगी। जल बोर्ड से निगम का कंट्रोल खत्म
शहरों में घर-घर शुद्ध जल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगा। यानी पानी-सीवर का कंट्रोल नगर निगमों और नगर पालिकाओं के पास से हटकर राज्य-स्तरीय बोर्ड के पास जाएगा।


