25वें 10 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव का सातवां दिन, महारानी जिंदा की वीरता और संघर्ष को दिखाया

भास्कर न्यूज | अमृतसर 25वें राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव के 7वें दिन विरसा विहार स्थित भाई गुरशरण सिंह ओपन एयर थियेटर में नाटक “महारानी जिंदा’ का मंचन हुआ। मंच-रंगमंच संस्था ने राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता शिरोमणि नाटककार केवल धालीवाल के नेतृत्व में इसे प्रस्तुत किया। अनामिका आर्ट्स एसोसिएशन अमृतसर के सहयोग से हुए इस नाटक को डॉ. आत्मा सिंह गिल ने लिखा और इमैनुअल सिंह ने निर्देशित किया। नाटक का उद्देश्य नई पीढ़ी को पंजाब के स्वर्णिम इतिहास से परिचित कराना था। इसमें महारानी जिंदा के संघर्ष और सिख साम्राज्य के पतन को दिखाया गया। महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल को पंजाब का सबसे समृद्ध और स्थिर समय बताया गया। उनके शासन में खालसा राज का सिक्का 13 पाउंड और 36 डॉलर के बराबर था। साक्षरता दर अपने उच्चतम स्तर पर थी। उनके शासन में किसी को मृत्युदंड नहीं दिया गया। नाटक में दिखाया गया कि महाराजा रणजीत सिंह के बाद अंग्रेजों ने चालाकी से महारानी जिंदा और उनके पुत्र महाराजा दलीप सिंह को निर्वासित कर दिया। महारानी जिंदा ने जीवनभर सिख साम्राज्य को वापस पाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया और अपने पुत्र दलीप सिंह को दोबारा सिख राज्य का महाराजा बनने के लिए प्रेरित किया। इस नाटक को लोककथा शैली में प्रस्तुत किया गया। शाह मुहम्मद की कविता और लोककथाओं के माध्यम से कहानी को जीवंत किया गया। कलाकारों में प्रितपाल हुंदल, इमैनुअल सिंह, आत्मा सिंह गिल, गुरपिंदर कौर, आलम सिंह, रवि कुमार, लखविंदर लक्की, साहिल, सुखविंदर सिंह, जसविंदर सिंह, मरकसपाल, प्रजादीप कौर, जशनप्रीत सिंह, आंचल महाजन, निकिता, तरण सभरवाल, समृद्धि कपूर, मुस्कान कौर, सुरभि, जिया, गुरलीन कौर, अनमोल राणा, प्रिंस, दिव्यांशु, सचिन शर्मा और प्रबीर सिंह ने दमदार अभिनय किया। इस अवसर पर केवल धालीवाल, भूपिंदर सिंह संधू, कलाकार अनीता देवगन, धरविंदर औलख, गुरतेज मान सहित बड़ी संख्या में रंग प्रेमी और दर्शक मौजूद थे। रंगमंच उत्सव में नाटक का अभिनय करते कलाकार।

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