शहर के विकास कार्यों को मंजूरी देने के लिए बुधवार को मेयर इंद्रजीत कौर की अध्यक्षता में एफएंडसीसी की बैठक हुई, लेकिन यह बैठक कई मायनों में अहम साबित हुई। 300 से अधिक प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखे गए थे, मगर सीनियर डिप्टी मेयर राकेश पराशर और डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर के विरोध के बाद केवल 100 प्रस्तावों पर ही विस्तार से चर्चा हो सकी। बैठक में जल्दबाजी में प्रस्ताव पारित करने की परंपरा पर इस बार लगाम लगती नजर आई और कई प्रस्तावों पर गहन विचार के बाद निर्णय लिए गए। शेष 200 प्रस्तावों को भी दो बार की मीटिंग में पास किया जाएगा। वीरवार को भी 100 प्रस्तावों को लेकर कमेटी ने मीटिंग रखी है। अन्य अहम फैसले {लक्कड़ पुल के नीचे 20 लाख की लागत से दुकानें बनाने का प्रस्ताव रद्द। {रंगला पंजाब योजना के तहत सड़क निर्माण प्रस्ताव फंड आने तक पेंडिंग। {चार पार्क मैनेजमेंट कमेटियों के गठन को मंजूरी। {वार्डों में सीवरमैन-सफाई कर्मी तैनाती को अलग कमेटी बनेगी। तर्क: बुड्ढा दरिया पर टिक नहीं पाएंगे प्लांटर एफएंडसीसी मीटिंग की अध्यक्षता करती कमिश्नर। मीटिंग में सिर्फ विधायक मदन लाल बग्गा के हल्का नार्थ में बुड्ढा दरिया किनारे करीब 25 लाख रुपए की लागत से सजावटी पौधों के लिए प्लांटर लगाने का प्रस्ताव चर्चा का केंद्र रहा। कमेटी में यह सवाल उठा कि जब दरिया पर पहले से ही करोड़ों रुपए के विकास और सफाई कार्य चल रहे हैं तो ऐसे में प्लांटर लगाने की क्या आवश्यकता है। सदस्यों ने तर्क दिया कि बरसात के मौसम में दरिया किनारों की नियमित सफाई और मिट्टी खिसकने की समस्या के कारण प्लांटर टिक नहीं पाएंगे। ऐसे में यह प्रस्ताव 25 लाख रुपए की बर्बादी मानते हुए रद्द कर दिया गया। बैठक में यह भी चर्चा रही कि बीएंडआर ब्रांच के इंजीनियरों ने बिना ठोस प्लानिंग के यह प्रोजेक्ट तैयार किया। {अवैध इमारतों पर फिर माहौल तलख: मॉडल टाउन, दुगरी, आत्म नगर, शिमलापुरी, बीआरएस नगर, हंबड़ां रोड, बीआरएस नगर, सराभा नगर और, जोन-सी, जोन-बी और जोन-ए के अधीन क्षेत्रों में अवैध इमारतों की भरमार का मुद्दा भी बैठक में उठा। डिप्टी मेयर प्रिंस जौहर ने निगम कमिश्नर से सवाल किया कि पिछली बैठक में सूची सौंपने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। मौके पर एमटीपी को तलब कर जवाब मांगा गया। आदेश जारी किए गए कि एमटीपी स्वयं मामलों की जांच करेंगे और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एटीपी और इंस्पेक्टरों को हटाया जाएगा। {ओएंडएम ब्रांच की जवाबदेही तय: ओएंडएम ब्रांच से यह भी रिकॉर्ड मांगा गया कि सुपर सक्शन मशीनों से कितनी जगहों पर सीवरेज सफाई हुई। खुलासा हुआ कि करीब एक साल में कई स्थानों पर केवल 30 से 40 फीसदी काम ही हो पाया है। कमेटी ने कड़ा एतराज जताते हुए लापरवाह कांट्रेक्टरों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की। निगम कमिश्नर ने संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए। शहर में पानी और सीवरेज की बढ़ती समस्याओं को लेकर ओएंडएम ब्रांच पर भी सवाल उठे। कमेटी सदस्यों ने कहा कि जेई और एसडीओ की ड्यूटी स्पष्ट नहीं है और शिकायतों का समाधान समय पर नहीं हो रहा। निर्देश दिए गए कि जिम्मेदारी तय हो, समस्याएं लंबित रहने पर संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए। कमिश्नर ने सहमति जताते हुए आदेश जारी किए। {3 करोड़ की सड़क के बाद चौड़ीकरण पर सवाल: जोन-सी में एक सड़क चौड़ी करने का प्रस्ताव बीएंडआर ब्रांच ने रखा। चर्चा में सामने आया कि कुछ समय पहले ही इस सड़क पर 3 करोड़ रुपए खर्च कर निर्माण हुआ था। ऐसे में इंजीनियरों से पूछा गया कि निर्माण के समय चौड़ीकरण पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। प्रस्ताव को पेंडिंग रखते हुए मौके की रिपोर्ट मांगी गई है। वहीं, गिल रोड पर अवैध रेहड़ी-फड़ी के कारण जाम की स्थिति पर भी चर्चा हुई। तहबाजारी ब्रांच की जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए गए। नोडल अफसर जसदेव सेखों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए। एफएंडसीसी ने आश्वासन दिया, अवैध कब्जों पर कार्रवाई में कोई सिफारिश बर्दाश्त नहीं होगी।


