उदयपुर में एक दर्जन से ज्यादा कॉलोनियों के करीब 25 हजार लोग अंडरपास नहीं होने से परेशान हो रहे हैं। मजबूरन उन्हें रॉन्ग साइड चलना पड़ रहा है। उदयपुर शहर से डबोक की तरफ कॉलोनियों में जाने के लिए पूरा एरिया विकसित कर दिया गया, लेकिन यहां आने के लिए हाईवे पर कोई अंडरपास नहीं दिया गया। इतनी आबादी वाले इलाके को अंडरपास की जरूरत है, लेकिन आज तक उदयपुर विकास प्राधिकरण ने इसका प्लान नहीं बनाया। इससे लोगों को रॉन्ग साइड पर ही चलना पड़ रहा है। इससे हादसे की भी आशंका रहती है। यह दर्द है उदयपुर शहर के नई बसावट वाले नाकोड़ा नगर और उसके आसपास की कॉलोनियों के लोगों का। उदयपुर शहर में डबोक एयरपोर्ट की तरफ से आने पर ट्रांसपोर्ट नगर के सामने की तरफ यह इलाका है। साथ ही एक दर्जन से ज्यादा कॉलोनियां नेशनल हाईवे के दोनों तरफ सर्विस रोड पर हैं। वहीं एक्सपर्ट ने कहा- मास्टर प्लान में तीन सड़कें उस इलाके को जोड़ने के लिए प्रस्तावित हैं। उस पर काम करेंगे तो काफी राहत मिलेगी, अंडरपास भी बना सकते हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों की तकलीफ को हमने जानने और समझने का प्रयास किया। इस बसावट वाले इलाके के लोग क्या कहते हैं और उनकी पीड़ा क्या है, पढ़िए इस रिपोर्ट में… पहले देखें PHOTOS
सबसे पहले जानें कौन-कौन से इलाकों में परेशानी
नाकोड़ा नगर, नाकोड़ा नगर-प्रथम, नाकोड़ा नगर-द्वितीय, नाकोड़ा नगर-थर्ड, नाकोड़ापुरम, गायत्री नगर, सौभाग्य नगर, तुलसी नगर, कपिल विहार, श्रीनाथ नगर, एन. भैरवाय नगर सहित करीब एक दर्जन कॉलोनियां बसी हुई हैं। अभी ऐसे जान खतरे में डाल रहे लोग
डबोक, देबारी और ट्रांसपोर्ट नगर से आने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहनधारी ट्रांसपोर्ट नगर के सामने वाले गेट के सामने बीच हाईवे के कट से रॉन्ग साइड से आते हैं। इस रॉन्ग साइड से लोग 200 से 300 मीटर तक वाहन लेकर चलते हैं। इस बीच प्रताप नगर की तरफ से हाईवे पर आने वाले वाहनों से आए दिन हादसे होते हैं। यहीं नहीं इस कट से कई दोपहिया गाड़ी चलाने वाले अपनी डिवाइडर से ही नीचे कूदाते हैं, जिससे सर्विस रोड पर आने वाले वाहनों से हर समय हादसे का अंदेशा रहता है और कई हादसे हो चुके हैं। उदयपुर शहर से प्रताप नगर होकर आने वाले वाहन चलाने वाले जिस सर्विस रोड से आते हैं, उसी सर्विस रोड से इन कॉलोनियों के लोग जाते हैं। ऐसे में सर्विस रोड पर वाहनों का दबाव क्षमता से ज्यादा हो जाता है। देबारी से राजस्थान विद्यापीठ के गेट तक दोनों तरफ जो सर्विस रोड है, उस पर कई भारी वाहन जगह-जगह खड़े हो जाते हैं। ऐसे में वहां सर्विस रोड भी संकरी हो जाती है। इधर, वाहनों का दबाव होने के बाद स्थितियां विकट हो जाती हैं। समाधान यह होना चाहिए
उदयपुर का डबोक एयरपोर्ट रोड की तरफ सबसे ज्यादा विस्तार हुआ तो नाकोड़ा नगर ही प्रमुख है। नाकोड़ा नगर भी अलग-अलग फेज में आगे बढ़ता गया। इसके बाद आसपास कई कॉलोनियां बन गईं। इस इलाके में इतने मकान बन गए हैं कि यहां कई कॉलेज और स्कूलों के स्टूडेंट्स भी यहां रहते हैं, जिनका इसी खतरे वाली रोड से आना-जाना होता है। एक्सपर्ट राय…
रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक सतीश श्रीमाली ने कहा- अंडरपास बना सकते हैं, लेकिन अन्य कई विकल्प हैं। इस पर भी काम करना चाहिए। ओल्ड आरटीओ वाली रोड को 60 फीट करने का काम भी करना चाहिए, वहां रोज कब्जे बढ़ रहे हैं। इसी प्रकार
प्रताप नगर चौराहा से आपणी ढाणी के पास से 60 फीट सड़क दे रखी है, इसको लिंक करना होगा। इसी प्रकार खेलगांव से मेगा आवास तक लिंक रोड है, उसे भी विकसित करना चाहिए। ऐसा होगा तो ट्रैफिक डायवर्ट हो जाएगा और लोग सीधे इन रास्तों को जा सकेंगे। मेगा आवास में 1700 फ्लैट में रहते लोग
इसी नाकोड़ा नगर के आखिरी छोर में उदयपुर विकास प्राधिकरण ने बेड़वास मेगा आवास योजना विकसित की। उसमें 1696 फ्लैट बनाए गए हैं। इन फ्लैट्स में रहने वाले लोगों की आवाजाही भी इसी रास्ते से होती है। 100 फीट रोड बनाई, हाईवे से नहीं जोड़ी
यूडीए ने मेगा आवास योजना तक जाने के लिए माउंट व्यू स्कूल के पास से 100 फीट रोड विकसित की है। ये रोड आगे पिंडवाड़ा हाईवे की तरफ कनेक्ट हो रही है। इसके बाद यहां यातायात का दबाव बढ़ा है। ये रोड आगे हाईवे पर कनेक्ट होती है, लेकिन माउंट व्यू स्कूल के पास आते ही लोगों को सर्विस रोड रॉन्ग साइड ही जाना होता है, क्योंकि हाईवे पार करने के लिए कोई ब्रिज नहीं है। विद्यापीठ के बाहर जाम और हादसे का केंद्र बना
सर्विस रोड से उदयपुर शहर की तरफ जाने वाले वाहन राजस्थान विद्यापीठ के गेट के बाहर जाकर हाईवे क्रॉस कर शहर कर तरफ जाते हैं। यहां वाहनों का दबाव इस कदर हो गया है कि हर समय जाम लगना आम हो गया है। जान खतरे में डालते हुए ही रोड क्रॉस होती है। यहां प्रताप नगर से, बेडवास से और ओल्ड आरटीओ की तरफ से गाड़ियां ही गाड़ियां आती हैं। सबको जल्दी रहती है और हादसे होना आम हो गया है। क्षेत्रवासियों का दर्द… 25 हजार
क्षेत्रवासी हरिवल्लभ आमेटा ने बताया- 25 साल से यहां रह रहा हूं और जब से आए हैं, तब से आज तक यहां अंडरपास नहीं बनाया। करीब 25 हजार लोग यहां रहते हैं और इसमें से 20 प्रतिशत तो स्टूडेंट ही यहां रहते हैं। हाईवे पर रॉन्ग साइड आना और जाना मजबूरी है। आए दिन हादसे होते हैं। इतनी बड़ी आबादी है, लेकिन हाईवे पार करने के लिए कोई रास्ता नहीं दिया गया है। नाहर सिंह चूंडावत ने बताया कि यहां कक्षा छह के एक बच्चे की मौत भी खराब सड़कों की वजह से हुई है। बाहर हाईवे पर रॉन्ग साइड जाने वालों की जान हर समय खतरे में है। हाईवे पर जाने के लिए कोई अंडरपास आज तक नहीं बनाया, जबकि इस एरिया का विस्तार होता जा रहा है।


