रांची में लंबे समय से बालू की किल्लत है। नई सरकार बनने के बाद बालू की स्थिति सामान्य होने की संभावना थी, लेकिन अब स्थिति और अधिक खराब हो गई है। ढूंढ़ने से भी बालू नहीं मिल रहा है। इससे रियल एस्टेट सेक्टर पूरी तरह ठप पड़ गया है। वहीं आम आदमी के घर का सपना भी टूट रहा है। बालू नहीं मिलने की सबसे अधिक मार प्रधानमंत्री आवास योजना, अबुआ आवास योजना के लाभुकों पर पड़ रही है। बालू नहीं मिलने से सभी तरह के निर्माण ठप हैं। इधर, जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि रांची में 30 बालू डीलरों को बालू बेचने का लाइसेंस दिया गया है। डीलरों के पास पर्याप्त मात्रा में बालू है। जिसे भी बालू लेना है, वे डीलर से सीधे बालू ले सकते हैं। दैनिक भास्कर ने प्रशासन के दावों की पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और निकली। प्रशासन ने जिन 30 डीलरों को लाइसेंस दिया है, उनमें से 26 के पास बालू का स्टॉक नहीं है। 15 डीलरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि लाइसेंस तो दे दिया, लेकिन बालू कहां से लाएंगे। रांची के 19 बालू घाटों में से सिल्ली के तीन घाट सुंडील, चोकोसेरेंगे और श्यामनगर बालू घाट को पर्यावरण स्वीकृति मिली है। लेकिन यहां से भी बालू का उत्खनन नहीं हो रहा है। बाकी 16 घाट कागजी प्रक्रिया में फंसे हैं। आसपास के जिले में भी बालू नहीं मिल रहा है। जब नदी से बालू नहीं निकल रहा है तो बेचेंगे कहां से। डीलरों ने दावा किया कि जो भी बालू मिल रहा है, वह पूरी तरह अवैध है। पुलिस-प्रशासन और स्थानीय नेता-अपराधी को मैनेज करके घाटों से बालू निकाल कर बेचा जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से प्रशासन की सख्ती की वजह से वह भी बंद हो गया है। डीलर के पास पर्याप्त बालू, नहीं बेच रहे तो जांच करेंगे रांची में इन्हें दिया गया डीलर लाइसेंस इदू खान, आशीष कुमार साहू, फर्स्ट च्वाइस रेडीमिक्स, फ्रंट रनर रेडी मिक्स कंक्रीट, हेतमसरिया प्लास्टिक प्रा., मनोज कुमार महतो, भृगु राम प्रसाद, भूतनाथ महतो, एवरग्रीन इंटरप्राइजेज, गुप्ता ट्रेडर्स, एनआर इंटरप्राइजेज, पलक इंटरप्राइजेज, पनसा इंटरप्राइजेज, राजू राय, एसएस इंटरप्राइजेज, संजय कुमार मोदक, शरण अल्कोहल, शेषधर महतो, शशि भूषण महतो, शिव कुमार, एसकेएम ऑटोमोबाइल, सुजीत कुमार जायसवाल, सुमीत कुमार, विनाश प्रोजेक्ट व अन्य। 3. पीसीसी सड़क व नाली का निर्माण रुका रांची शहर में 50 से अधिक पीसीसी सड़क और आरसीसी नाली का निर्माण बालू की कमी के कारण रुका हुआ है। ठेका लेने वाले ठेकेदारों को निगम काम पूरा करने का दबाव बना रहा है, लेकिन अधिकतर योजना पर काम शुरू नहीं हुआ है। कई योजनाएं अधूरी पड़ी हुई हैं। 1000 अबुआ आवास का काम रुका, ढलाई तक नहीं हो पाई कांके के गागी गांव में अबुआ आवास योजना के तहत घर बना रहे महंगू मुंडा ने बताया कि पहले बालू मिल रहा था तो काम तेजी से हो गया। लेकिन अब बालू नहीं मिल रहा। एक ट्रक के लिए 10 हजार रुपए से अधिक मांगा जा रहा है। इतना पैसा कहां से लाएंगे। इसलिए अधूरा घर बनाकर दरवाजे-खिड़की को भी ईंटा से बंद कर दिए हैं। ढ़लाई भी नहीं हो पाई है, इसलिए एसबेस्टस की छत डाली है। ऐसे 1000 आवास का निर्माण बालू की वजह से रुका हुआ है। . दो माह से पांचवें तल्ले की ढलाई नहीं हो पा रही कटहल मोड़ स्थित होम्स डेवलपर्स के पांचवें तल्ले की ढलाई होनी है। बिल्डर ने बताया कि दो माह पहले ही ढलाई हो जाती, लेकिन बालू नहीं मिला। इस वजह से दिक्कत आ रही है। अब बंगाल या बिहार से बालू मंगा रहे हैं। जल्द ही ढलाई होगी। बिल्डर ने बताया कि रांची में 100 से अधिक अपार्टमेंट का निर्माण बालू की वजह से धीमा पड़ा हुआ है। अफसरों ने कैसे नियमों में उलझा कर कराई बालू की क्राइसिस पहले बालू घाटों का टेंडर होता था। जिसे ठेका मिलता था, वह बालू निकालकर बेचता था। घाट का ठेका जितना अधिक में होता था, सरकार को उतना राजस्व मिलता था। लेकिन आम आदमी को पर्याप्त मात्रा में बालू मिल जाता था, वह भी काफी कम कीमत पर। प्रशासन का दावा- रांची में 30 डीलरों को बालू बेचने का लाइसेंस, किल्लत नहीं ऐसे समझिए असर… बिहार और बंगाल में बालू घाटों का टेंडर किया हुआ है। घाट का ठेका लेने वाले ठेकेदार नदी से बालू निकालने के साथ उसकी बिक्री भी कर रहे हैं। इसके लिए बाकायदा चालान जारी किया जा रहा है। इस वजह से बिहार-बंगाल से बालू मंगाना ज्यादा आसान है। सिर्फ दूरी और टोल टैक्स अधिक लगने की वजह से इसमें खर्च अधिक आ रहा है। इसलिए बालू महंगा पड़ रहा है। इसके बावजूद बिहार से बालू मंगा कर डीलर बेच रहे हैं। जेएसएमडीसी ने बालू से राजस्व बढ़ाने के लिए वर्ष 2019 में टेंडर किया। सभी घाटों की अलग-अलग कीमत तय कर दी गई। बाद में नियम बदल दिया। जेएसएमडीसी ने 2021 में फिर टेंडर निकाला। इसमें पहले बालू घाट से बालू बेचने का प्रावधान किया गया, लेकिन बाद में बदल दिया गया। फिर नदी से बालू निकालकर स्टॉक करने का नियम बनाया। इसके लिए 2.35 रुपए प्रति सीएफटी कीमत तय की गई। इसमें एमडीओ (माइंस डेवलपिंग ऑपरेटर) को काफी नुकसान था। इसलिए एमडीओ बालू उत्खनन की प्रक्रिया में पीछे रह गए। जेएसएमडीसी ने 2023 में फिर नियम में बदलाव किया। इस बार नदी से बालू निकाल कर स्टॉक में रखने के लिए टेंडर किया गया। राज्य के 444 घाटों में से 90 प्रतिशत घाट का टेंडर हो गया। लेकिन सिक्योरिटी मनी स्लैब के हिसाब से जमा करने के प्रावधान की वजह से कई एमडीओ पीछे हट गए।


