भास्कर न्यूज | अमृतसर 42 साल पहले सरकारी सेवा में भर्ती हुए एक पूर्व पटवारी आज पेंशन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। सुल्तानविंड गांव निवासी तरजिंदर सिंह ने सरकार से मानवीय आधार पर पेंशन और अन्य लाभ जारी करने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि लंबी सेवा के बावजूद उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आज तक कोई आर्थिक सहारा नहीं मिला। तरजिंदर सिंह के अनुसार वे 1 जून 1982 को अमृतसर जिले में पटवारी नियुक्त हुए थे। वह एससी समाज से संबंध रखते हैं। उनका आरोप है कि गांव में जमीन विवाद के चलते कुछ जमींदारों से रंजिश हो गई थी। 15 सितंबर 1991 को हुए हमले के मामले में दोनों पक्षों पर केस दर्ज हुए। तरजिंदर का कहना है कि बाद में बदले की भावना से उन्हें 17 मार्च 1993 को विजिलेंस केस में फंसा दिया गया। 2 दिसंबर 2008 को जिला सेशन जज की अदालत से उन्हें एक साल की सजा और जुर्माना हुआ। इसके बाद 19 जून 2009 को डिप्टी कमिश्नर अमृतसर के आदेश पर बिना विभागीय सुनवाई के उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। तरजिंदर ने बताया कि उनके भाई, जो तरनतारन में पटवारी थे, को भी 2007 में विजिलेंस केस में गिरफ्तार किया गया और 2011 में सजा हुई। परिवार का आरोप है कि यह सब पुरानी रंजिश का परिणाम था। पंजाब सरकार को लिखे गए पत्र में उन्होंने कुछ उन केसों के बारे जानकारी दी, जिन केसों में कर्मचारियों को उनके बेनिफिट्स दिए गए। जिसमें उन्होंने सिविल अपील नंबर 6770/2013 तारीख 14 अगस्त 2013 के तहत झारखंड स्टेट बनाम जतिंदर कुमार श्रीवास्तव व अन्यों में हुई जजमेंट आर्टिकल 300-ए अॉफ द कंस्टीच्यूशन तहत सभी पैंशन व पेंशनरी लाभ दिए जाने के आदेश दिए गए । इसी तरह हाईकोर्ट पंजाब सीडब्लूपी नंबर 18512 अॉफ 2014 तारीख 29 जुलाई 2016 की जजमेंट में पंजाब सिविल सर्विस रुल्स वॉल्यूम-1 रूल 2.2 (बी) के तहत सभी पपैंशन व पेंशनरी लाभ दिए जाने के आदेश है। इसी तरह तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर कमलदीप सिंह संघा की ओर से एक केस जूनियर सहायक अमरजीत सिंह के एसडीएम-1 से सेवामुक्त होने पर पंजाब सिविल सर्विस रुल्स वोल्यूम 11 चैप्ट 11 के नियम 2.2 बी में दर्ज उपबंधों के मुताबिक लीव इनकैशमेंट और पैंशन के सभी लाभ दिए गए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनके केस में पैंशनरी लाभ उन्हें दिए जाएं ताकि वह परिवार का गुजारा सही तरीके से कर सके। तरजिंदर सिंह ने बताया कि उनकी सेवानिवृत्ति आयु 31 अगस्त 2015 को पूरी हो चुकी है, लेकिन उन्हें आज तक पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट या अन्य लाभ नहीं मिले। तरजिंदर सिंह ने बताया कि 2017 में उन्हें ब्रेन क्लॉट हुआ, जिसके बाद स्टंट डलवाना पड़ा। स्ट्रोक के कारण शरीर का दाहिना हिस्सा प्रभावित हो गया। बाद में भी कई बार अटैक आए और बोलने में दिक्कत हुई। ईलाज और दवाइयों पर हर महीने करीब 7 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं। आय का कोई साधन न होने से परिवार कर्ज लेकर गुजारा कर रहा है। पूर्व पटवारी ने सरकार से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और पूर्व मामलों के उदाहरणों के आधार पर उन्हें भी पेंशन और सभी पेंशनरी लाभ दिए जाएं। उनका कहना है कि आर्थिक मदद मिलने पर वे अपना इलाज सही ढंग से करवा सकेंगे और परिवार का भरण-पोषण कर पाएंगे।


