लुधियाना| जिला अदालत ने रिश्वत लेते हुए कैमरे में कैद पुलिसकर्मियों की पहचान न होने पर सख्त रुख अपनाते हुए जज अमरिंदर सिंह की अदालत ने चेतावनी दी है कि अगर वीडियो में दिखे पुलिसकर्मियों की पहचान नहीं की गई तो अदालत की अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। दो टूक- कह दें पहचान संभव नहीं, ताकि आगे कार्रवाई करें अदालत ने यह भी कहा कि 5 फरवरी 2025 से पुलिस बार-बार समय मांगती रही है। एसएचओ ने उस दिन इसे आखिरी मौका बताया था, लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस जानकारी पेश नहीं की गई। शुक्रवार को फिर से अंतिम मौका मांगे जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने अब 20 फरवरी तक का अंतिम समय देते हुए निर्देश दिया है कि या तो वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की पहचान की जाए या फिर साफ रिपोर्ट दी जाए कि पहचान संभव नहीं है, ताकि आगे की सुनवाई की जा सके। गौरतलब है कि यह मामला साल 2019-20 का है। लॉटरी कारोबारी सुभाष केट्टी ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी खुलेआम लॉटरी विक्रेताओं से रिश्वत ले रहे हैं। उन्होंने इसके वीडियो सबूत तत्कालीन पुलिस कमिश्नर को सौंपे थे। कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट के आदेशों पर सुनवाई कर रही जिला कोर्ट ने कहा कि यह उसके आदेशों की जानबूझकर अवहेलना है। पिछले करीब एक साल से पुलिस को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं कि 28 वीडियो क्लिप में दिख रहे कर्मियों की पहचान की जाए, लेकिन अब तक पुलिस इसमें सफल नहीं हो सकी है इस मामले में थाना डिवीजन-3 के एसएचओ नरदेव सिंह अदालत में पेश हुए। हालांकि अदालत ने उनके जवाब को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने बताया कि 21 अप्रैल 2025 को पंजाब के गृह विभाग को पत्र लिखकर सक्षम अधिकारी को पेश करने के आदेश दिए गए थे, इसके बावजूद न तो थाना डिवीजन-3 की पुलिस और न ही लुधियाना सीपी इस काम को पूरा कर सकी।


