28.24 लाख का सबसे बड़ा तो 465 रुपए का सबसे छोटा चेक बाउस, 1 लाख से ज्यादा अमाउंट वाले 11 चेक शामिल

भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की ओर से डिफॉल्टरों से भुगतान के लिए जनवरी से मार्च तक स्पेशल अभियान चलाया था। वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन 31 मार्च को 2 करोड़ टैक्स आया तो 44 लाख के चेक बाउस हो गए। 53 डिफॉल्टरों के खिलाफ दोबारा से सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने भुगतान के लिए 86.32 लाख के चेक दिए थे जो बाउंस हो गए। बता दें कि 465 रुपए से लेकर 28.24 लाख रुपए तक के चेक बाउंस हुए हैं। जिसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के अफसरों की सिरदर्दी बढ़ गई है। इन डिफॉल्टरों से रिकवरी के लिए दोबारा से जोर-आजमाइश करनी होगी। यदि खुद अपनी गलती मान लेते हैं, तो अफसरों को मुश्किलें नहीं आएंगी। 31 मार्च 2025 को अकेले इस दिन 44.76 लाख रुपए से ज्यादा राशि के चेक बाउंस हुए। 1 लाख से अधिक राशि वाले 11 चेक बाउंस हुए हैं, जिनकी कुल राशि 69.37 लाख से ज़्यादा है। चेक बाउंस मामले में 20 सितंबर 2024 को 1910 रुपए तो 13 मार्च 2024 को 13688 रुपए और 30 अगस्त 2024 को 16613 रुपए का चेक बाउंस हुआ था। इसके अलावा 111718 रुपए का चेक बाउंस हुआ। बता दें कि साल 2024-25 के लिए प्रॉपर्टी टैक्स का टारगेट निगम अफसर 50 करोड़ बताते रहे हैं। मगर 31 मार्च तक डिफॉल्टरों से 41.69 करोड़ कलेक्शन होने पर बता दिया गया कि सरकार से 40.90 करोड़ रुपए का टारगेट मिला था। यानि कि जो भी टारगेट दिया गया उसे प्रॉपर्टी टैक्स विभाग ने आसानी से पूरा कर लिया है। असिस्टेंट कमिश्नर दलजीत सिंह ने बताया कि साल 2024-25 के दौरान के चेक बाउंस हुए हैं। लास्ट दिनों में पेमेंट आती है। किसी का साइन मिसमैच हुआ या कटिंग लग गई और किसी वजह से चेक बाउंस हो जाता है। कई बार पार्टियों को भी पता नहीं होता कि उनका चेक बाउंस हो गया है। इनसफिशिएंट फंड ही सिर्फ नहीं होता, इसके कई और भी वजह हो सकते हैं। फिलहाल, प्रॉपर्टी टैक्स विभाग की तरफ से चेक बाउंस मामले में धारा-138 (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) के तहत 21 दिनों के अंदर कोर्ट केस की कार्रवाई करनी होती है मगर ज्यादातर यह पार्टियां कोर्ट कार्रवाई प्रोसेस से पहले बकाया भुगतान कर देती हैं। चेक बाउंस मामलों की लिस्ट मंगलवार को ही आई है। जिसमें एक्शन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। 7 दिन में सारे बकाए का भुगतान क्लियर करा लिया जाएगा। नोटिस तैयार किया जा चुका है। हालांकि आनाकानी करने पर दोबारा से नोटिस भेजने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद भी नहीं माने तो इनके कोर्ट में केस भी दायर किया जा सकता है। दूसरी तरफ 12 दिन से एमसेवा ऐप बंद है जिससे जोनवार डिटेल नहीं मिल पाई है। पंजाब म्यूनिसिपल अधिनियम 1976 की धारा 138 के तहत चेक बाउंस मामलों में डिफॉल्टरों को नोटिस दिया जाएगा। यदि भुगतान नहीं किया तो प्रॉपर्टी सील करने की कार्रवाई की जाती है। यह राशि वसूल करने की जिम्मेदारी जोनल सुपरिंटेंडेंट की बनती है। इसके अलावा कोर्ट केस की कार्रवाई भी बनती है। बता दें कि डिफॉल्टरों की ओर से दिए चेकों में सबसे बड़ा 28,24,999 रुपए का और सबसे छोटा 465 रुपए का चेक बाउंस हुआ है। बता दें कि चेक बाउंस होने का कारण बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस न होना, चेक पर साइन मैच न होना, तकनीकी गड़बड़ी (जैसे ओवरराइटिंग, तारीख गलत), जानबूझकर समय खींचने की रणनीति, सरकारी/निजी संस्थानों का लापरवाह रवैया हो सकता है। डिफॉल्टरों से बनता सारा भुगतान कराया जाएगा। सर्वर डाउन था इसलिए जोनवार डिटेल पता नहीं लग पाया। भुगतान नहीं कराया तो प्रॉपर्टी सील कर दिया जाएगा। चार दिन से अधिक का समय नहीं दिया जाएगा। यह रुटीन का प्रोसेस है। हर जगह इस तरह की समस्या आती है। कोई नया इशू नहीं है। सभी जिलों में इस तरह के केस सामने​मिल जाएंगे। -विशाल वधावन, असिस्टेंट कमिश्नर, निगम

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