छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। बंगाल में बने लो प्रेशर एरिया के प्रभाव से प्रदेश में अगले तीन दिनों तक कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वहीं रात के तापमान में अगले सात दिनों तक विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 40 मिलीमीटर बारिश ओरछा और बड़े बचेली में रिकॉर्ड की गई। तापमान की बात करें तो जगदलपुर में सबसे अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 11.9 डिग्री सेल्सियस रहा। लो प्रेशर एरिया के चलते बदल रहा मौसम मौसम में बदलाव की मुख्य वजह समुद्र और ऊपरी हवा में बन रहे सिस्टम हैं। दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह समुद्र के ऊपर हवा के दबाव में कमी के कारण बनता है। इसके साथ लगभग 3 किलोमीटर ऊंचाई तक हवा का चक्रवाती घुमाव भी बना हुआ है। हालांकि यह सिस्टम अगले 24 घंटे में पूर्व दिशा की ओर बढ़ते हुए कमजोर पड़ सकता है, लेकिन इसके कारण नमी वाली हवाएं प्रदेश तक पहुंच रही हैं। इसके अलावा मध्य और ऊपरी स्तर की पश्चिमी हवाओं में एक ट्रफ (हवा की द्रोणिका) बनी हुई है, जो पूर्वी भारत के ऊपर सक्रिय है। साथ ही गंगीय पश्चिम बंगाल और उत्तर तटीय ओडिशा के पास ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इन सभी सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से छत्तीसगढ़ के ऊपर नमी और अस्थिरता बढ़ रही है, जिससे बादल बन रहे हैं और कहीं-कहीं हल्की बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन रही है। पहले देखिए ये तस्वीरें- बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का मजबूत क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में कम दबाव का मजबूत क्षेत्र बना हुआ है। इसका मतलब यह है कि वहां हवा तेजी से उस क्षेत्र की ओर खींच रही है और ऊपर तक (लगभग 6 किमी ऊंचाई तक) बादल बनने की स्थिति मजबूत है। यह सिस्टम पहले पश्चिम-उत्तर दिशा में थोड़ा बढ़ेगा और फिर उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ सकता है। अगले 48 घंटों तक यह सक्रिय बना रहेगा। लो प्रेशर से जुड़ी ट्रफ लाइन (नमी की पट्टी) इस लो प्रेशर से एक ट्रफ (हवा और नमी की लंबी पट्टी) निकलकर तमिलनाडु, कर्नाटक और दक्षिण महाराष्ट्र तक फैली हुई है। यह ट्रफ जमीन से करीब 1 किमी की ऊंचाई पर बनी हुई है। इसका काम है नमी को दूर-दूर तक फैलाना। ये ट्रफ एक तरह की नमी की पाइपलाइन है, जिससे समुद्र की नमी अंदरूनी इलाकों तक जा रही है। ऊपरी हवा में पश्चिमी विक्षोभ जैसी ट्रफ इसके अलावा करीब 5-6 किमी ऊंचाई पर हवा की एक और लंबी हलचल बनी हुई है, जो 93° पूर्वी देशांतर के आसपास और 24° उत्तरी अक्षांश के उत्तर में स्थित है। यह सिस्टम ऊपरी वायुमंडल में है और बादलों को ऊंचाई पर फैलने में मदद करता है। यानी ऊपर से ठंडी हवा का असर है, नीचे से नमी आ रही है दोनों मिलकर मौसम को अस्थिर बनाते हैं। छत्तीसगढ़ पर सीधा असर नहीं, लेकिन मौसम बदलने की संभावना यह सिस्टम छत्तीसगढ़ के बहुत पास नहीं है, इसलिए तेज बारिश या तूफान की संभावना नहीं है। लेकिन वातावरण में नमी बढ़ेगी। कुछ इलाकों में आंशिक बादल छा सकते हैं दिन का तापमान थोड़ा गिर सकता है। रात में हल्की ठंड या उमस महसूस हो सकती है। दक्षिण छत्तीसगढ़ (बस्तर संभाग) में बादल ज्यादा छाए रह सकते हैं। फरवरी, ठंड के लौटने का माह रायपुर की बात करें तो जनवरी की तरह फरवरी महीने में भी आसमान आमतौर पर साफ बना रहता है और सतही हवाएं हल्की रहती हैं। हालांकि उत्तर भारत से गुजरने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से कभी-कभार मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान बादल छाने के साथ गरज-चमक और बारिश की स्थिति बनती हैं। कुछ मौकों पर आंधी, ओलावृष्टि और तेज हवाएं भी चलती हैं। सर्दियों का असर कम होते ही न्यूनतम तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। कुछ स्थितियों में न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे भी चला जाता है। इसके साथ ही कुछ वर्षों में फरवरी महीने में अच्छी बारिश भी रिकॉर्ड की गई है। रायपुर में 1893 को पड़ी थी सबसे ज्यादा ठंड रायपुर में फरवरी महीने में अब तक की सबसे ज्यादा ठंड 9 फरवरी 1893 को पड़ी थी। उस दिन तापमान सिर्फ 5 डिग्री तक गिर गया था। वहीं सबसे ज्यादा गर्म दिन 28 फरवरी 2009 रहा, जब तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया था। यानी फरवरी में भी कभी-कभी मई जैसी गर्मी पड़ सकती है। 4 फरवरी 1917 को सिर्फ 24 घंटे में 57.4 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह फरवरी के लिहाज से बहुत ज्यादा बारिश मानी जाती है। इसके अलावा 1901 में फरवरी महीने के दौरान कुल 118.9 मिमी बारिश हुई थी। अब गुजरती हुई ठंड की ये तस्वीरें देखिए… बच्चों पर पड़ रहा ठंड का असर पिछले दिनों कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ रहे थे। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है। नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है। क्या है हाइपोथर्मिया? हाइपोथर्मिया एक लाइफ थ्रेटनिंग इमरजेंसी स्थिति है। इसमें शरीर का सामान्य तापमान 98.6 फॉरेनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) से नीचे चला जाता है। तापमान गिरने पर शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता और धीरे-धीरे उसके अहम अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर हवा या पानी के संपर्क में आकर तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। शरीर की लगभग 90 फीसदी गर्मी त्वचा और सांस के जरिए बाहर निकलती है। ठंडी हवा या नमी के संपर्क में आने पर यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति ठंडे पानी में है, तो उसका शरीर हवा की तुलना में 25 गुना तेजी से अपनी गर्मी खोता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने भी जारी की एडवाइजरी स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि शीतलहर के दौरान, केवल आवश्यकता होने पर ही यात्रा करें और बाहर निकलते समय पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें। सर्दियों में इम्यूनिटी मजबूत करें विटामिन C रिच डाइट लें विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करती है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है। विटामिन C की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसके लिए सर्दियों में विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे संतरा, नींबू, आंवला को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे न सिर्फ इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि वायरल इन्फेक्शन का खतरा भी कम होता है। अदरक-तुलसी की चाय बेहद फायदेमंद अदरक और तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार हैं। इसकी चाय पीने से वायरल इन्फेक्शन से बच सकते हैं। इसके अलावा तुलसी और अदरक का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। यह शरीर में जमे कफ को बाहर निकलता है। साथ ही सर्दी-ज़ुकाम, खांसी और गले की खराश में आराम दिलाता है।


