होली की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस बना हुआ है। होलिका दहन और धुलंडी की तारीख को लेकर ज्योतिषाचार्यों के अलग-अलग मत हैं। कारण है- 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण और पूर्णिमा पर भद्रा का प्रभाव। अब सवाल है कि होलिका दहन कब होगा और रंगों की होली किस दिन खेली जाएगी? रंगों वाली होली किस दिन खेली जाएगी? सबसे पहले जानिए होली के 2 मुहूर्त 1. जयादित्य पंचांग के संपादक पंडित अमित शर्मा ने बताया कि इस साल 2 मार्च को देर रात्रि में होलिका दहन किया जाएगा और 3 मार्च को होली खेली जाएगी। 2. ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष, ज्योतिषाचार्य डॉ. पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि 2 मार्च को प्रदोष व्यापनी पूर्णिमा होने के कारण होलिका दहन इसी दिन किया जाएगा। रात 1 बजकर 25 मिनट से 2 बजकर 37 मिनट के बीच होलिका दहन करना सबसे उचित रहेगा। इसके अलावा, 3 मार्च को सूर्योदय से पहले सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक भी होलिका दहन किया जा सकता है। भद्रा के कारण प्रदोषकाल में दहन संभव नहीं परंपरा के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को सूर्यास्त के बाद किया जाता है, लेकिन उस समय भद्रा नहीं होनी चाहिए। इस बार 2 मार्च को प्रदोषकाल में भद्रा होने से उस समय होलिका दहन शास्त्रसम्मत नहीं माना गया है। इसलिए प्रदोषकाल में होलिका दहन नहीं किया जाएगा। यदि पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण हो तो उससे पूर्व रात्रि में भद्रारहित समय में होलिका दहन करना चाहिए। यदि अगले दिन ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण हो तो पिछले दिन भद्रा समाप्ति के बाद रात्रि के चौथे प्रहर या भद्रा के पुच्छ भाग में होलिका दहन होना चाहिए। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च को ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण है। निर्णयसिन्धु में कहा है कि पूर्णिमा को ग्रहण हो तो उससे पूर्वरात्रि में जिस समय भद्रा न हो उसमें होलिका का दहन करें। अगर दूसरे दिन ग्रस्तोदित चन्द्रग्रहण हो तो पिछले दिन भद्रारहित रात्रि के चौथे प्रहर में सूर्योदय से पहले या फिर रात्रि में भद्रा के पुच्छभाग में दहन होगा।
सूतक सुबह से प्रभावी होगा 3 मार्च को लगने वाला चंद्रग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इस आधार पर 3 मार्च को सुबह लगभग 6 बजकर 21 मिनट से सूतक प्रभावी माना जाएगा। सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के कपाट बंद किए जा सकते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन को वर्जित माना जाता है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सूतक और ग्रहण के प्रभाव में रंग-गुलाल खेलना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। 4 मार्च को रंगों वाली होली ज्योतिषाचार्य डॉ. पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया – 3 मार्च की शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन 4 मार्च को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन धुलंडी और रंगों की होली मनाई जाएगी। इस प्रकार इस साल 2 मार्च की देर रात्रि में होलिका दहन होगा, 3 मार्च को चंद्रग्रहण रहेगा और 4 मार्च को रंगों की होली का उत्सव मनाया जाएगा।


