3 वर्ष में साइबर ठगी के 3804 केस; 3057 धराए, पर सजा सिर्फ 55 को

मोबाइल, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ने आम लोगों की जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी भी तेजी से सक्रिय हुए हैं। झारखंड में बीते तीन वर्षों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डेटा चोरी और बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं। गृह विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच 3804 साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए। पुलिस ने इन मामलों में 3057 आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई का दावा किया, लेकिन अदालत में सजा दिलाने की तस्वीर बेहद निराशाजनक है। तीन वर्षों में सिर्फ 55 अभियुक्तों को ही दोषी ठहराया जा सका, जबकि 521 आरोपी बरी हो गए। यह स्थिति बताती है कि गिरफ्तारी के बाद भी जांच और साक्ष्य प्रबंधन की प्रक्रिया कहीं न कहीं कमजोर पड़ रही है। झारखंड में तीन साल में दर्ज साइबर अपराध (आंकड़े गृह विभाग से प्राप्त) तकनीकी कमजोरी से कमजोर पड़ रहे साइबर केस साइबर अपराधों की जांच सामान्य मामलों की तुलना में अधिक जटिल होती है। अपराधी अक्सर फर्जी पहचान और अंतरराज्यीय नेटवर्क का उपयोग करते हैं, जिससे दोष सिद्ध करना कठिन हो जाता है। डिजिटल फुटप्रिंट, आईपी एड्रेस, सर्वर लॉग और ट्रांजेक्शन ट्रेल जैसे साक्ष्य अहम होते हैं, लेकिन समय पर डेटा सुरक्षित न होने से केस कमजोर पड़ जाते हैं। उन्नत फॉरेंसिक लैब, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और बेहतर समन्वय की कमी भी बड़ी चुनौती है। अदालत में सजा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल साक्ष्यों की मजबूत और वैज्ञानिक प्रस्तुति जरूरी है। केस 1 अपर बाजार: रिश्तेदार बन 1.97 लाख रुपए उड़ाए अपर बाजार के कार्ट सराय रोड निवासी अर्पण जालान की वृद्ध मां को 15 मार्च 2024 को साइबर अपराधियों ने रिश्तेदार बनकर झांसा दिया। खाते की जानकारी लेकर 1.97 लाख रुपए निकाल लिए। 30 अप्रैल को मामला दर्ज हुआ, लेकिन पैसा अब तक वापस नहीं मिला। केस 2 बरियातू: बैंक अधिकारी बनकर 86 हजार रुपए की ठगी 24 मार्च 2024 को बरियातू निवासी विनोद कुमार को फोन कर खुद को बैंक अधिकारी बताने वाले अपराधियों ने 86 हजार रुपए ठग लिए। 27 मार्च को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई। दो साल बाद भी न रकम वापस मिली और न ही किसी आरोपी को सजा हो सकी। सौरभ कुमार, पूर्व तकनीक अधिकारी, साइबर पुलिस, झारखंड “ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डेटा चोरी और बैंकिंग फ्रॉड के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है।”

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