कपिल कुमार | जालंधर सिटी में 3.25 लाख घरों पर यूआईडी (यूनिक आइडेंटिफिकेशन) नंबर प्लेट तो लग चुकी है, लेकिन लोगों को अभी तक क्यूआर कोड प्लेट का वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि नगर निगम ने अब तक यूआईडी प्लेट को अपने सिस्टम से इंटीग्रेट नहीं किया है। इंटीग्रेशन न होने के कारण लोग क्यूआर कोड स्कैन कर खुद से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने की सुविधा से वंचित हैं। वर्तमान में लोग सीवर जाम, दूषित पानी सप्लाई और बंद एलईडी लाइटों से संबंधित शिकायतें दर्ज कराते हैं। इंटीग्रेशन के बाद शिकायत दर्ज करते समय घर की यूआईडी नंबर प्लेट के जरिए लोकेशन भी स्वतः दर्ज हो सकेगी, जिससे समस्या के समाधान में आसानी होगी। गौरतलब है कि निगम सीमा में 3.25 लाख घरों पर यूआईडी नंबर प्लेट लगाने का काम पूरा हो चुका है, लेकिन इंटीग्रेशन न होने से ये प्लेट फिलहाल शोपीस बनकर रह गई हैं। हालांकि यूआईडी प्लेट लगने के बाद संपत्तियों की संख्या में इजाफा हुआ है। पहले निगम सीमा में 2.93 लाख संपत्तियां दर्ज थीं, जो अब बढ़कर 3.25 लाख हो गई हैं। अब नगर निगम यूआईडी नंबर प्लेट को इंटीग्रेट करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इसके लिए एक एजेंसी को यह कार्य सौंपा जाएगा। एजेंसी के कर्मचारी डोर-टू-डोर जाकर कंप्यूटर के माध्यम से इंटीग्रेशन का काम करेंगे। इसके पूरा होने के बाद निगम को एक क्लिक पर प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों की जानकारी मिल सकेगी और जुर्माने सहित टैक्स की वसूली की जाएगी। इससे निगम की आय में भी वृद्धि होगी। निगम सीमा में शामिल 11 गांवों में भी लगेंगी यूआईडी नंबर प्लेट नगर निगम सीमा में शामिल 11 गांवों में घरों पर यूआईडी नंबर प्लेट लगाने की योजना है। इसके लिए निगम ने 1.80 करोड़ रुपये का एस्टिमेट तैयार किया है। चंडीगढ़ से मंजूरी मिलते ही निगम द्वारा यह कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस एस्टिमेट में घरों की यूआईडी नंबर प्लेट को इंटीग्रेट करना और शहर के 9 सेक्टरों में यूआईडी नंबर प्लेट अपग्रेड करने का काम भी शामिल है। टैक्स डिफॉल्टरों की पहचान कर कार्रवाई करेंगे निगम जल्द ही यूआईडी नंबर प्लेट को इंटीग्रेट करने का काम शुरू करेगा। इसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। – महीप सरीन, टैक्स सुपरिटेंडेंट


