उदयपुर की पर्वतारोही मनस्वी अग्रवाल ने 7000 मीटर (करीब 23,000 फीट) ऊंची चोटी ‘अकोन्कागुआ’ पर भारतीय तिरंगा फहराया है। इस उपलब्धि के साथ मनस्वी अग्रवाल, राजस्थान की अर्ध सैनिक बल में कार्यरत पर्वतारोही गीता सामोता के बाद अकोन्कागुआ शिखर पर पहुंचने वाली राज्य की दूसरी महिला बन गई हैं। मानसी ने पिछले महीने अंटार्कटिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी ‘विन्सन मैसिफ’ को फतह कर राजस्थान के प्रथम पर्वतारोही बनी थी। 22 पर्वतारोहियों में से मात्र 12 ही अभियान में सफल दरअसल, एशिया के बाद शेष छह महाद्वीपों में अकोन्कागुआ सर्वाधिक ऊंचाई वाली चोटी है, जहां 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली भीषण ठंडी हवाएं और माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिरता तापमान पर्वतारोहियों की असाधारण परीक्षा लेता है। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण मनस्वी के साथ गए विश्वभर के 22 पर्वतारोहियों में से मात्र 12 ही इस अभियान में सफल हो सके। एक मिशन कपूरा करते ही दूसरे मिशन में लगी मनस्वी अग्रवाल अंटार्कटिका अभियान को 23 दिसंबर 2025 को पूर्ण करने के बाद भारत भी नहीं लौटी थी। 15 दिन से भी कम दिन के अंतर में, 9 जनवरी 2026 को अकोन्कागुआ के लिए फिर से पर्वतारोहण मिशन प्रारंभ कर दिया। जो अपने आप में हैरत की बात है। इतने अल्प समय में दो अत्यंत कठिन अंतरमहाद्वीपीय अभियानों को सफलतापूर्वक पूर्ण करना उनकी अद्वितीय मानसिक दृढ़ता, शारीरिक क्षमता और अनुशासन का प्रमाण है। 5 महीने में विश्व की सात चोंटियों में चार पर तिरंगा फहराया इससे पहले मनस्वी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी ’माउंट एलब्रस’ और अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी ’किलीमंजारो’ को भी सफलतापूर्वक फतह किया है। इस प्रकार वे मात्र पांच माह से भी कम समय में विश्व के सात में से चार महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर विजय प्राप्त कर एक कीर्तिमान स्थापित कर चुकी हैं। उनका लक्ष्य एक वर्ष की अवधि में शेष तीन महाद्वीपों की सर्वाेच्च चोटियों को भी फतह कर ‘सेवन समिट्स’ अभियान को पूर्ण करना है। साढ़े छह हजार मीटर ऊंची बर्फीली चोटियों पर रहकर अभ्यास मनस्वी अग्रवाल ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में कठोर और वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने ’माउंटेनरिंग इंस्टीट्यूट दिरांग’ तथा ’हिमालयन माउंटेनरिंग इंस्टीट्यूट’ से मूलभूत एवं एडवांस पर्वतारोहण प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगभग एक माह तक साढ़े छह हजार मीटर ऊंची बर्फीली चोटियों पर रहकर अभ्यास कराया जाता है। ये दोनों संस्थान भारतीय सेना द्वारा संचालित हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने ’स्वामी विवेकानन्द रॉक क्लाईबिंग संस्थान’ से भी गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रमाणित प्रशिक्षक का दर्जा हासिल किया है। मिशन के साथ-साथ पढाई में भी अव्वल मनस्वी अग्रवाल ने ’गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ से पांच साल लॉ डिग्री हासिल की है। अभी में वे पर्यावरणीय कानून पर शोध कर रही हैं। हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य पात्रता परीक्षा में 99.2 पर्सेंटाइल के साथ पास की हैं। साथ ही वे स्थानीय प्रतिष्ठित सिंघानिया लॉ कॉलेज में सहायक आचार्य के रूप में अध्यापन भी कर रही हैं।


