सिटी रिपोर्टर| दुर्ग छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद निगम प्रशासन पहली बार बिजली कंपनी से संपत्ति कर वसूलने की तैयारी में है। यह संपत्ति कर बिजली कंपनी के शहर में लगे करीब 3 हजार बिजली पोल, 500 से अधिक ट्रांसफार्मर और बिजली सप्लाई में इस्तेमाल किए जा रहे अन्य उपकरणों के एवज में वसूले जाएंगे। इसके लिए निगम ने बिजली कंपनी को डिमांड नोट जारी कर दिया है जो कि वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए जारी किया गया है। उसके पहले के वित्त वर्ष को इसमें शामिल नहीं किया गया है। हालांकि इसके पहले बिजली कंपनी इस तरह के भुगतान को करने से इंकार कर चुका है। बिजली कंपनी ने संपत्ति कर भुगतान नहीं करने को लेकर प्रावधानों को आधार बनाया है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक छत्तीसगढ जब मध्यप्रदेश का हिस्सा था तब निगम क्षेत्र में बिजली कंपनी के बिजली पोल, टांसफार्मर सहित अन्य संपत्तियों पर संपत्ति कर नहीं वसूलने का प्रावधान रखा गया। यही प्रावधान छत्तीसगढ अलग राज्य बनने के बाद भी जारी रहा। जबकि निगम के राजस्व अधिकारियों को मुताबिक बाद में इस प्रावधान में संशोधन कर दिया गया। जिसके बाद निगम प्रशासन बिजली कंपनी से भी संपत्ति कर वसूलने का हकदार हो गया है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के साथ संपत्ति कर की वसूली को लेकर बैठक भी हुई लेकिन उसमें नतीजा नहीं निकला। बिजली कंपनी के अधिकारियों ने टैक्स देने से इनकार कर दिया। इसके बाद निगम के राजस्व विभाग ने बिजली कंपनी को डिमांड नोट जारी कर दिया है। साथ ही इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर निगम के अधिकारी बिजली कंपनी के अफसरों के साथ बैठक करने की तैयारी में है। भुगतान नहीं करने पर बिजली बिल में एडजस्ट करेंगे दुर्ग नगर निगम के राजस्व अधिकारी के मुताबिक डिमांड नोट इसलिए जारी किया गया है कि बिजली कंपनी संपत्ति कर का भुगतान करे। यदि वह संपत्ति कर का भुगतान नहीं करती है तो जो बिजली बिल का भुगतान उसे यानि निगम को करना है, उसमें टैक्स की राशि को एडजस्ट किया जाएगा। बता दें कि जिले के चारों निगम (दुर्ग, भिलाई, रिसाली और भिलाई 3 चरोदा) पर बिजली कंपनी 53.73 करोड़ बिजली बिल बकाया है। जिसमें जल प्रदाय, सड़क बत्ती और अन्य कनेक्शन का बिल शामिल है।


