भास्कर न्यूज | बालोद उत्कृष्ट ब्राह्मण सामाजिक संगठन समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ की बिलासपुर मातृशक्ति परिषद् इकाई ने महामाया देवी की नगरी रतनपुर के श्रीसत्संग मंडप में 31 ब्राह्मण बटुकों का सामूहिक उपनयन संस्कार कराया। समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष पं. रामानुज तिवारी (सिकोसा) ने बताया कि यह रतनपुर में पहली बार आयोजित प्रदेश स्तरीय एक दिवसीय सामूहिक उपनयन संस्कार था। शुभ मुहूर्त में 31 ब्राह्मण बटुकों को जनेऊ धारण कराया गया। उपनयन संस्कार (यज्ञोपवीत संस्कार) सनातन धर्म में कुल 16 संस्कारों में दसवां है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को अंधकार से दूर कर प्रकाश और आध्यात्म की ओर बढ़ाना है। जनेऊ धारण करने से व्यक्ति को यज्ञ और स्वाध्याय का अधिकार प्राप्त होता है तथा त्रिदेव का आशीर्वाद मिलता है। समारोह में वैदिक रीति-रिवाज के अनुसार मंडप की तेलमाटी, मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, मातृका पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद सभी बटुकों का मुंडन और स्नान कराया गया। आठ ब्राह्मणों के साथ अष्ट ब्राह्मण भोज संपन्न किया गया। बटुकों को पलाश दंड पकड़ाकर जनेऊ धारण करवाया गया और भगवान सूर्यनारायण का दर्शन कराया गया। प्रत्येक बटुक को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई और जनेऊ धारण के बाद नियमों के पालन की शिक्षा दी गई। अंत में सभी बटुकों ने उपस्थित स्वजनों से भवति भिक्षां देहि कहते हुए भिक्षा मांगी। संस्कार संपन्न होने के बाद बटुकों ने नए वस्त्र धारण किए और मंदिर परिसर में आतिशबाजी की। धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का संरक्षण जरूरी सामूहिक उपनयन संस्कार का उद्देश्य धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना है। इस अवसर पर माता-पिता और समाज को यह संदेश दिया गया कि दीक्षा का अर्थ है जीवन को दिशा देना। संगठन के कोषाध्यक्ष पं. प्रेमशंकर शुक्ला और प्रदेश संगठन विस्तार प्रमुख सीमा दुबे ने जानकारी दी कि यह पहला साल था जब प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे रायपुर, अंबिकापुर, पेन्ड्रा, जांजगीर-चांपा, सक्ती, कोरबा, बलौदा बाजार आदि से बटुक आए। पं. दुर्गा शंकर दुबे,पं. कपिल देव पांडेय, आचार्य डॉ. राजेन्द्र कृष्ण पांडेय,पं. दीपक दुबे, पं. महेन्द्र पांडेय मौजूद थे।


