भास्कर न्यूज | प्रतापगढ़ शहर में भूमि उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने एक बड़ा अभियान चलाया है। कलेक्टर और नगर परिषद की पूर्व सभापति रामकन्या गुर्जर और उनके पति प्रह्लाद गुर्जर के विवाद के बाद नगर परिषद ने कई बेशकीमती जमीनों के पट्टे खारिज कर अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए थे। गुरुवार देर शाम को प्रतापगढ़ तहसीलदार रामेश्वरलाल रेगर ने जानकारी दी कि शहर के गुप्त गंगा क्षेत्र के पीछे स्थित राजस्व ग्राम प्रतापगढ़ की कृषि भूमि पर अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। खाता संख्या 342 के अंतर्गत आराजी नंबर 34 में कुल 5 हैक्टेयर भूमि में से 0.5800 हैक्टेयर पर चारदीवारी की गई थी, इसमें से 0.1100 हैक्टेयर कृषि भूमि पर बिना रूपांतरण आदेश और बिना निर्माण स्वीकृति के पक्के निर्माण किए गए। तहसीलदार ने बताया कि खातेदारों द्वारा कृषि भूमि की प्रकृति बदलकर उसे अकृषि प्रयोजनार्थ उपयोग में लिया जाना राजस्थान भू-संपरिवर्तन नियम 2007 का स्पष्ट उल्लंघन है। साथ ही पक्का निर्माण कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करना राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 की धारा 177 के तहत भी अवैध माना गया है। प्रकरण में कुल 35 खातेदारों के विरुद्ध कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। तहसीलदार ने न्यायालय उपखंड अधिकारी (एसडीएम) प्रतापगढ़ के समक्ष धारा 177, आरटीए 1955 के तहत दावा प्रस्तुत करते हुए संबंधित खातेदारों को तत्काल बेदखल करने और भूमि को बिलानाम/सिवायचक सरकार के खाते में दर्ज करने की मांग की। न्यायालय उपखंड अधिकारी प्रतापगढ़ ने इस प्रकरण को संख्या 07/2026 के तहत दर्ज किया और सभी 35 खातेदारों को नोटिस जारी किए। संभावित परिणाम और प्रशासन का सख्त संदेश यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित खातेदारों के नाम राजस्व रिकॉर्ड से हटाए जा सकते हैं और भूमि को सरकारी खाते में दर्ज किया जा सकता है। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हलचल मची है और भूमि उपयोग नियमों के पालन के प्रति सख्ती का संदेश दिया गया है। अब सभी की निगाहें न्यायालय में होने वाली आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।


