भास्कर न्यूज | गिरिडीह स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत शहर की सफाई को बेहतर बनाने के लिए गिरिडीह नगर निगम ने वर्ष 2018–19 में करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से कई आधुनिक सफाई वाहन और मशीनें खरीदी थीं। इनमें माउंटेड मैकेनिकल रोड स्वीपर, ट्रक माउंटेड स्प्रिंकलर और सीवर सक्शन‑कम‑जेटिंग ट्रक शामिल थे। इनका उद्देश्य शहर की सफाई और नाली-नालियों की नियमित देखभाल को मजबूत करना था। हालांकि, छह वर्षों में इन मशीनों का उपयोग नगण्य रहा। बताया जाता है कि इनका संचालन शहर में 50 बार से भी कम हुआ है। वर्तमान में अधिकांश वाहन नगर निगम के यार्ड में खड़े-खड़े बेकार पड़े हैं और धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं। माउंटेड मैकेनिकल रोड स्वीपर के अंदर अब पुराने काटर्न रखे जाने लगे हैं, जबकि सीवर सक्शन‑कम‑जेटिंग ट्रक भी लंबे समय से निष्क्रिय है। इसके अलावा कई अन्य मशीनों, जिनका उपयोग डस्टबीन उठाने और सड़क सफाई में किया जा सकता था, वे भी निष्क्रिय हो चुकी हैं। दो डस्टबीन उठाने वाली मशीनें भी लंबे समय से प्रयोग में नहीं हैं। इस स्थिति के कारण शहर में सफाई का कार्य अब भी मैनुअल तरीके से किया जा रहा है। मशीनों का सही संचालन और रखरखाव न होने से निगम की योजना पूरी तरह फेल हो गई है और आधुनिक उपकरणों की पूरी क्षमता शहर की सफाई में उपयोग नहीं हो रही है। संकरी गलियों में बड़ी सफाई मशीनें बेकार शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए माउंटेड मैकेनिकल रोड स्वीपर, ट्रक माउंटेड स्प्रिंकलर और सीवर सक्शन‑कम‑जेटिंग ट्रक खरीदे थे। ये मशीनें आकार में बड़ी और अत्याधुनिक हैं, लेकिन शहर की अधिकतर गलियां इतनी सकरी हैं। जिस वजह से मशीनें आसानी से उनमें प्रवेश नहीं कर पातीं। इसके साथ ही इन मशीनों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर भी नहीं हैं। जब जरूरत पड़ती है, तो नगर निगम अधिकारी इन मशीनों को सड़कों तक ले जाकर सफाई कराते हैं, लेकिन सकरी गलियों में इन्हें पहुंचाना मुश्किल होता है। इसी कारण से इन वाहनों और मशीनों का उपयोग नगण्य रह गया है। वहीं मशीनों की खरीद में शहर की गलियों की चौड़ाई और संचालन की वास्तविक परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप, केवल कुछ मुख्य सड़कों को छोड़कर अधिकांश गलियों में इन मशीनों का प्रवेश नहीं हो सका। ट्रैक्टर में लगी मशीनों से होती है नाले का सफाई गिरिडीह नगर निगम ने बड़ी मशीनों के सकरी गलियों में प्रवेश न कर पाने के कारण ट्रैक्टर में लगे सीवर सक्शन‑कम‑जेटिंग वाहन का उपयोग शुरू किया है। इस वाहन से नालियों की सफाई समय-समय पर की जाती है। इसके बाद, नाली में बची गाद और कचरे को मैनुअल तरीके से मजदूरों द्वारा बाहर निकाला जाता है और सड़कों पर रखा जाता है। जब कचरा सूख जाता है, तो उसे ट्रैक्टर में लादकर डंपिंग स्थल तक पहुंचाया जाता है।


