भास्कर न्यूज | अमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में चहेते बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और सरकारी खजाने को नुकसान का खेल फिर शुरू होने की चर्चा है। 4 महीने पहले रणजीत एवेन्यू ब्लॉक-सी और 97 एकड़ स्कीम के विकास कार्यों के लिए निकाला गया 52.81 करोड़ का टेंडर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रस्ट इसे नए सिरे से निकालने की तैयारी में है मगर फिर से एकमुश्त 52.81 करोड़ का ही टेंडर लगाने की योजना बना रहा है। जबकि ट्रस्ट के पास यह अधिकार है कि वह चंडीगढ़ मुख्यालय से मंजूरी लेकर इसी काम को छोटे-छोटे कई टेंडर में बांट सकता है। छोटे टेंडर निकालने से सरकारी खजाने की बचत भी होगी। चूंकि बड़े फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए करीब 53 करोड़ का टेंडर तो निकाल दिया जाएगा मगर कंपीटीशन कम होने के कारण ठेकेदार लेस कम डालते हैं। जबकि छोटे-छोटे टेंडर 10-20 करोड़ के निकाले जाएं तो कंपीटीशन ज्यादा होने पर ठेकेदार 25 से 30 फीसदी तक लेस डालने से पीछे नहीं हटते। रणजीत एवेन्यू में डवलपमेंट कामों को लेकर 4 साल पहले करीब 38 करोड़ रुपए का टेंडर निकाला गया था। चेयरमैन करमजीत सिंह रिंटू के कार्यकाल दौरान 15 करोड़ रुपए का बढ़ा दिया गया जिससे रणजीत एवेन्यू ब्लॉक-सी व 97 एकड़ स्कीम के तहत डवलपमेंट कराया जाना है। यदि अलग-अलग टेंडर लगाए गए होता तो साराकुछ सही रहता और अब तक टेंडर प्रक्रिया फाइनल होने के साथ ही डवलपमेंट कार्य भी शुरू हो जाते। लेकिन बड़ी फर्म को फायदा पहुंचाने का खेल अंदरखाते चलने से सिंगल टेंडर पर जोर दिया जाता है। 53 करोड़ का टेंडर गड़बड़ियों का जीता-जागता उदाहरण है। बड़े टेंडर में लेस अकसर कम जाता है। जबकि छोटे ठेकेदारों में कंपीटीशन अधिक होने के कारण लेस 20 से 25 फीसदी तक भी डालते हैं। जिससे सरकारी खजाने की बचत होती है। निगम ने पिछले साल 85 वार्डों के डवलपमेंट को लेकर 10-10 लाख रुपए के टेंडर लगाए थे। जिसमें ठेकेदारों में कंपीटीशन बढ़ने से 48 फीसदी तक लेस डाला गया था।


