40 किलो वजनी वीर हनुमान का मुखौटा धारण किया:रामलीला के समापन पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा, शिवराज ने की पूजा-अर्चना

रायसेन में 70 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत रामलीला के समापन पर भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस साल रिंकेश गुर्जर ने 40 दिन के कठिन ब्रह्मचर्य व्रत के बाद 40 किलो वजनी हनुमान का मुखौटा धारण किया। शोभायात्रा शनिवार शाम 6 बजे बावड़ी पुरा स्थित हनुमान मंदिर से प्रारंभ हुई। श्रद्धालुओं के ‘जय महावीर तेरी जय रघुवीर’ के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीर हनुमान के मुखोटे की पूजा अर्चना की। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर आरती उतारी। शोभायात्रा तिपट्टा बाजार के बड़े मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद गंज बाजार होते हुए रामलीला मैदान पहुंची। जगह-जगह बिछाए गए फूल
वीर हनुमान के मुखौटे की शोभा यात्रा शनिवार शाम 6 बजे बावड़ी पुरा हनुमान मंदिर से शुरू हुई इसकी तैयारी दोपहर 2 बजे से की जा रही थी। शोभा यात्रा मालीपुरा, टिपट्टा बाजार, भारत माता चौराहा, से होती हुई मुख्य बाजार पहुंची यहां से महामाया चौक, गंज बाजार हनुमान मंदिर से रामलीला मैदान पहुंची। यहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा वीर हनुमान के मुखोटे की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद रावण दहन के बाद शोभा यात्रा वापस बावड़ी पुरा हनुमान मंदिर के लिए रवाना हुई। 40 दिनों तक नियमों का करना होता है पालन
साल में दो बार हनुमान मुखौटा धारण कर शोभायात्रा निकाली जाती है। मुखौटा धारण करने वाले व्यक्ति को 40 दिनों तक कड़े नियमों का पालन करना होता है। इस दौरान वह केवल स्वयं या अपनी माता द्वारा बनाया गया भोजन ही ग्रहण कर सकता है। मुखौटा धारण करने वाले का चयन जय महावीर समिति द्वारा प्राचीन हनुमान मंदिर में एक कन्या द्वारा पर्ची निकालकर किया जाता है। पहली पर्ची वाले को दशहरे पर और दूसरी पर्ची वाले को रामलीला मेले में रावण दहन के दिन मुखौटा धारण करना होता है। छह बार मुखौटा धारण किया था
लगातार छह बार मुखौटा धारण करने वाले स्व. गुट्टी लाल कुशवाहा के पुत्र कल्याण कुशवाहा बताते हैं कि यह परंपरा रायसेन जिले में ओबेदुल्लागंज और रायसेन शहर में की जाती है। यह परंपरा लगभग 70 साल पुरानी है और अभी तक 70 से 75 लोग अपने सिर पर वीर हनुमान का मुखौटा धारण कर चुके हैं। कल्याण कुशवाहा ने बताया कि मेरे पिता स्व. गुट्टी लाल कुशवाहा द्वारा छह बार मुखौटा धारण किया गया था। मुखौटा का चेहरा पानीपत से पूरी भक्ति भाव के साथ रायसेन लेकर आए थे। तस्वीरों में देखें भव्य शोभायात्रा की झलकियां…

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