धनबाद के टुंडी की पहाड़ियों में करीब 3 महीने रहने के बाद 40 हाथियों का दल सोमवार को गिरिडीह के पारसनाथ क्षेत्र की ओर रवाना हो गया। टुंडी के ऋषिभीठा में आने के बाद दल की हथिनियों ने दो शिशुओं को जन्म दिया था। उनकी सुरक्षा के लिए पूरा दल वहीं टिका हुआ था। उनके जन्म के कुछ समय बाद हाथियों ने पहाड़ियों से उतरकर जाने की कोशिश की, पर रास्ते में ग्रामीणों से सामना हो जाने के कारण बार-बार लौट जा रहे थे। पिछले शनिवार को भी करीब 20 हाथी नौहाट, डिग्री कॉलेज होते हुए सलैया जंगल तक पहुंचे थे, लेकिन फिर पहाड़ी पर लौट गए थे। हाथी सुरक्षित रास्ते की तलाश में आए थे वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वे हाथी सुरक्षित रास्ते की तलाश में आए थे। वे बाकी हाथियों को लेकर रविवार की रात उसी रास्ते से सलैया जंगल, धधकाटांड़, चरक होते हुए गुलियाडीह पहुंचे। वहां से बराकर नदी पार कर गिरिडीह सीमा में चले गए। हाथियों का दल काफी दिनों से निकलने की कोशिश में था
टुंडी के प्रभारी फॉरेस्टर साजिद अली ने बताया कि हाथियों का दल काफी दिनों से टुंडी पहाड़ से निकलने की कोशिश में था। सुरक्षित रास्ता चिह्नित करने के बाद हाथी पहाड़ से उतरकर चरक के पास बराकर नदी तट पर पहुंचे। नदी के किनारे-किनारे चलते हुए सुबह तक गुलियाडीह पहुंच गए और वहीं रुक गए। मशालचियों की टीम उन पर नजर रखे रही
इस दौरान फॉरेस्टर साजिद, प्रकाश टुडू, पूरण चंद महतो, पूर्ण मरांडी व मशालचियों की टीम उन पर नजर रखे रही। शाम 4:30 बजे दल के सरदार ने चिंघाड़कर दूसरे हाथियों को इकट्ठा किया। व्यस्क हाथियों ने शिशुओं को सुरक्षा घेरे में ले लिया। शाम 5:30 बजे सरदार हाथी ने फिर आवाज लगाई और सब बराकर नदी पार करने लगे। इससे ग्रामीणों के साथ वन विभाग की टीम ने भी राहत की सांस ली। फोटो : सुभोजीत घोषाल ——————————– ये भी खबर पढ़िए हाथियों के लिए खेल का मैदान बना धान का खेत:बच्चे के जन्म की वजह से नहीं छोड़ रहे इलाका; लोगों के लिए फसल बचाना चुनौती चांडिल में जंगली हाथियों के उत्पात के कारण किसानों के लिए धान की फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। खेतों में तैयार धान की फसल को जंगली हाथी खाकर और रौंद कर नष्ट कर रहे हैं। हाथी रोज किसी ना किसी गांव में घुस फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। धान का खेत हाथियों के लिए खेल का मैदान बन गया है। दो दंतेल हाथियों को अक्सर खेतों में आपस में खेलते देखा जा रहा है। यह सिलसिला करीब तीन महीने से चल रहा है। पढ़िए पूरी खबर…


