41 सिम बिना सत्यापन के जारी की, इन्हीं से हुआ 17.14 करोड़ का फ्रॉड

अजमेर| शहर के एक प्रोपट्री डीलर के साथ 8.50 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने 84 दिनों के दौरान अलग-अलग कई बैंक खातों में प्रोपट्री डीलर से राशि जमा कराई। पीड़ित को जब ठगी का अहसास हुआ तो उसने साइबर थाने में संपर्क किया। साइबर थाने के प्रोग्रामर ने बताया कि श्रीराम विहार कॉलोनी वैशाली नगर निवासी हितेश साहू ने रिपोर्ट पेश की है। साहू ने बताया कि 19 नवंबर 2025 को उसके पास एक कॉल आया था। कॉलर ने खुद को शेयर मार्केट का सलाहकार बताया। अच्छा मुनाफा कमाने की बात कहकर शेयर मार्केट में निवेश करने के लिए कहा। उसने कंपनी का नाम वाई-63 आरबीके मार्केट परिवार नाम की कंपनी का नाम बताकर इसमें इंवेस्ट करने का झांसा दिया। गूगल पर इस कंपनी को जांचा गया तो सेबी से मिलती जुलती कंपनी लगने पर विश्वास बढ़ गया। इसके बाद युवक ने चार बार अलग-अलग खातों में कुल 8.50 लाख रुपए की राशि जमा करा दी। रिटायर्ड अफसर को मनीलॉन्ड्रिंग केस में संदिग्ध बता धमकी दी, 5 माह डिजिटल अरेस्ट करते रहे, 66.49 लाख रुपए ठगे प्रदेश में साइबर ठगों के बढ़ रहे हौंसले: कहीं रिटायर्ड अधिकरियों व लोगों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दे कर रहे ठगी, तो कहीं संगठित अपराध को दे रहे अंजाम अनूपगढ़ | शहर के 9 सिम विक्रेताओं की आेर से बिना सत्यापन प्रक्रिया अपनाए 41 सिम कार्ड जारी करने का मामला सामने आया है। इन 41 सिम कार्ड से देश में कुल 17 करोड़ 14 लाख 86 हजार 564 रुपए का साइबर फ्रॉड किया गया है। अनूपगढ़ से जारी हुई इन सिम कार्डों में से एक भी सिम अनूपगढ़ लोकल एरिया में उपयोग में नहीं ली जा रही है। अनूपगढ़ पुलिस ने स्वयं संज्ञान लेकर 9 सिम विक्रेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह मामला एसआई गोविंद सिंह ने दर्ज करवाया है। मामले के अनुसार एमएचए – डीओटी द्वारा देश में घटित साइबर अपराधों का विश्लेषण किया गया, जिसके बाद साइबर अपराधों में उपयोग लिए गए मोबाइल सिम के विक्रेताओं की सूची साइबर क्राइम राजस्थान जयपुर, गृह मंत्रालय व दूर संचार विभाग के पत्र के जरिए अनूपगढ़ पुलिस को साइबर पोर्टल पर प्राप्त हुई। थानाधिकारी ने बताया कि भारत सरकार के दूरसंचार विभाग डीओटी द्वारा मोबाइल सिम बेचने के लिए नियम निर्धारित किए गए हैं जिसकी अवहेलना करते हुए अनूपगढ़ के 9 मोबाइल सिम विक्रेताओं ने 41 सिम कार्ड संदिग्ध व्यक्तियों को विक्रय किए हैं। जिसका उपयोग वर्तमान में साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जा रहा है। इन 41 मोबाइल नंबर के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिर्पोटिंग पोर्टल पर विभिन्न शिकायतें दर्ज हैं। अनूपगढ़ शहर के मोबाइल सिम विक्रेताओं ने कुल 957 सिम कार्ड जारी किए हैं, जिसमें से 41 सिम कार्ड ऐसे जारी किए गए हैं जिनमें ग्राहक सत्यापन प्रक्रिया की पालना नहीं की गई। निजी स्वार्थ के चलते जारी िकए गए इन सिम कार्ड का उपयोग साइबर अपराध को अंजाम देने में किया गया। भरतपुर के जवाहर नगर निवासी एक सेवानिवृत अधिकारी के साथ ठगों ने खतरनाक और लंबा जाल बिछाया। ठगों ने खुद को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस और बैंगलोर पुलिस बताकर पीड़ित को करीब पांच महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उसे डरा-धमका कर करीब 66.49 लाख रुपए ठग लिए। जिले के एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने इस मामले में साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है। पीड़ित ने बताया वह ठगों से इस कदर डर गया कि उसने कई बार सुसाइड करने की भी कोशिश की। ठगी का यह सिलसिला 18 अगस्त 2025 से शुरू होकर 29 जनवरी 2026 तक यानी लगभग साढ़े पांच महीने तक चला। ठगों ने जांच के नाम पर पीड़ित को करीब पांच महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। रोज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उसे ऑनलाइन निगरानी में रखा जाता था। इसके बाद भी हर तीन घंटे में रिपोर्टिंग करानी पड़ती थी। पीड़ित को अपनी लोकेशन, गतिविधि और साथ मौजूद व्यक्ति की जानकारी देनी होती थी। डिजिटल अरेस्ट के चलते पीड़ित ने दिन के सभी रुटीन कार्य छोड़ दिए थे। घर में उस समय केवल प|ी साथ रहती थी। प|ी को बार-बार शक होता था, लेकिन पीड़ित खुद को किसी सरकारी प्रोजेक्ट में व्यस्त बताकर बात टाल देता था। पीड़ित का बेटा एमबीए कर मुंबई में नौकरी करता है और रोज शाम बातचीत होती थी। पीड़ित की दो बेटियां भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है, उन्हें भी कुछ नहीं बताया गया। ठगों ने धमकाया था कि यदि किसी को बताया तो परिवार के सदस्यों को सात साल की सजा होगी। इसी डर के कारण पीड़ित किसी को कुछ नहीं बता पाया।पीड़ित ने प|ी की पीएनबी बैंक की एफडी और पोस्ट ऑफिस की 36 लाख रुपए की एफडी तुड़वाई।ठगों ने आरटीजीएस और यूपीआई से अलग-अलग किस्तों में 22.05 लाख, 35.70 लाख और 6.55 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए। पैसे मिलने पर ठग बाकायदा सुप्रीम कोर्ट के फर्जी लेटरहैड पर राशि प्राप्ति की रसीद भी भेजते थे ताकि पीड़ित को शक न हो। यह पूरा मानसिक टॉर्चर तब खत्म हुआ जब पीड़ित अहसास हुआ कि वह किसी बड़ी साजिश का शिकार हो चुका है। इसके बाद पीडि़त ने पुलिस को सूचना दी। भरतपुर एसपी दिगंत आनंद ने बताय कि पीड़ित को करीब पांच महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 66.49 लाख रुपये की ठगी की गई। मामला सामने आते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की गई और एक विशेष टीम गठित कर जांच शुरू कर दी गई है। शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगे 8.50 लाख

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