42 किलो से ज्यादा अफीम तस्करी का मामला:कोर्ट ने एक आरोपी को बरी किया, 2018 में जोधपुर NCB ने की थी कार्रवाई

सीकर के विशिष्ट न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट के जज राजेंद्र कुमार शर्मा ने NCB जोधपुर के द्वारा सीकर में 2018 में अफीम की तस्करी के खिलाफ की गई कार्रवाई के मामले में आज एक आरोपी को संदेह के लाभ के आधार पर दोषमुक्त किया है। गाड़ी में मिले थे अफीम के पैकेट एडवोकेट रघुनाथ सुला ने बताया कि जोधपुर NCB की टीम ने सीकर में अफीम की तस्करी की गुप्त सूचना मिलने पर 19 जुलाई 2018 को सीकर के पिपराली सर्किल पर गुजरात नंबर की स्विफ्ट गाड़ी की तलाशी ली। गाड़ी में 2 लोग बैठे थे। जिनमें एक ने अपना नाम सुरेश जाट और दूसरे ने नरेश कुमार होना बताया। NCB टीम जोधपुर के रणजीत कुमार ने उन दोनों को खुद का और अपनी टीम का परिचय दिया और गुप्त सूचना बताते हुए गाड़ी की तलाशी लेने को कहा। दोनों ने कहा कि उनकी गाड़ी में अफीम नहीं है। लेकिन जब टीम के द्वारा गाड़ी की तलाशी ली गई तो उनकी गाड़ी से अफीम के 42 पैकेट(42.186 किलो) मिले। साथ ही गाड़ी से 46 हजार 600 रुपए भी मिले। 22 लाख में हुआ था सौदा इनमें नरेश कुमार ने बयान दिया कि उसका भाई श्रवण कुमार निवासी नोखा असम के गुवाहाटी में एक किराए के मकान में रहता था। और वह एक युवक जो मणिपुर का रहने वाला था उसे जानता था। जनवरी 2018 और मार्च 2018 में उस मणिपुर निवासी युवक ने ही नरेश को 25-25 किलो अफीम दी जो उसने सांचौर में अलग-अलग लोगों को सप्लाई कर दी थी। इसके बाद 15 जुलाई को नरेश कुमार और सुरेश कुमार दोनों स्विफ्ट गाड़ी लेकर गुवाहाटी गए। यहां नरेश ने अपने भाई श्रवण को कहा कि वह अफीम खरीदने के लिए 23 लाख रुपए लेकर आया है। इसके बाद 16 जुलाई को मणिपुर निवासी युवक अफीम देने के लिए किराए के मकान पर आया। जहां उसने 42 पैकेट अवैध अफीम के दिए। इसके बदले में नरेश ने उस मणिपुर निवासी युवक को 22 लाख रुपए दे दिए। संदेह का लाभ मिला बरी हुआ इसके बाद गाड़ी को कंटेनर के जरिए दिल्ली भेज दिया और दोनों 17 जुलाई को फ्लाइट से दिल्ली आए। इसके बाद 19 जुलाई को गाड़ी लेकर नोखा के लिए रवाना हुए। इसके बाद सीकर में उन्हें पकड़ लिया गया। बयानों के आधार पर बाद में श्रवण कुमार को गिरफ्तार करके पूछताछ की गई। फिर तीनों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह,204 दस्तावेज पेश किए। लेकिन अभियोजन मामले में यह साबित नहीं कर पाया कि मामले में पकड़ गया श्रवण तस्करी में शामिल हो। जिसके बाद आज मामले में विशिष्ट न्यायाधीश NDPS एक्ट जज राजेंद्र कुमार शर्मा ने श्रवण कुमार निवासी नोखा को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया‌। मामले में श्रवण कुमार की तरफ से पैरवी एडवोकेट रघुनाथ सुला के द्वारा की गई।

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