420 आंगनबाड़ियों की जांच में हर जगह कमियां:बच्चे-गर्भवतियों की थाली से पोषण ‘चोरी’ आंगनबाड़ी में बिना बर्तनों के बांटा आहार

भोपाल मप्र के कुपोषित बच्चों को पूरक पोषण आहार देने में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ऑडिट की आपत्ति के बाद विधानसभा की पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) ने मामले का परीक्षण किया तो पता चला कि आंगनबाड़ियों में भोजन पकाने का बर्तन तो मिला, पर पके हुए आहार को जिन बर्तनों में बांटा गया, वे थे ही नहीं। वह रजिस्टर भी गायब था, जिससे बच्चों की सही संख्या का पता चलता। साफ है कि कुपोषित बच्चों की थाली से ‘पोषण आहार की चोरी’ हो गई। दरअसल, पीएसी ने 2009-10 से 2015-16 के बीच हुई ऑडिट की आपत्तियों की जांच की है। इस दौरान पूरक पोषण आहार पर 5012 करोड़ रुपए खर्च किए गए। विधानसभा में पेश हुई पीएसी की यह रिपोर्ट हाल ही में सामने आई। वर्ष 2022- 23 की इस रिपोर्ट में और भी गड़बड़ियों का जिक्र है। कुछ जगहों पर टेक होम राशन (6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों व गर्भवतियों को दिया जाने वाला पैकेट) ही एक्सपायरी डेट का पाया गया। वहीं 85 आंगनबाड़ियों में अटेंडेंस रजिस्टर नहीं मिला। पूरक पोषण आहार नवजात, गर्भवतियों और 6 साल से छोटे बच्चों के शारीरिक विकास और कुपोषण से जुड़ा है। इसलिए 420 आंगनबाड़ियों की जांच में जो कमियां सामने आई हैं, उन्हें ठीक करने के लिए विभाग कदम उठाए। कोई आदेश या निर्देश जारी हों तो यह देखें कि उसका पालन जमीन पर अफसर कर रहे हैं या नहीं। ठोस निगरानी के साथ मंत्रालय स्तर से इस पर नजर रखी जाए।’ – पीएसी की टिप्पणी ये जिम्मेदार… डायरेक्टर व कमिश्नर यही थे 2009-10 से 2015-16 तक डायरेक्टर और कमिश्नर पद पर अनुपम राजन, डीडी अग्रवाल, मनोहर अगनानी, नीलम शमी राव, पुष्प लता सिंह थे। इसके अलावा साढ़े पांच साल तक जेएन कंसोटिया और दो साल बीआर नायडू प्रमुख सचिव रहे। खेल : 6 साल में 80 लाख बच्चों को नहीं मिला आहार ऑडिट में पता चला कि 2011-12 में बच्चों-गर्भवतियों की संख्या 97.50 लाख थी। यह 2012-13 से 2014-15 तक 97.68 लाख रही। यानी चार साल में सिर्फ 18 हजार संख्या बढ़ी, पर 2015-16 में इसे 7.32 लाख बढ़ाकर दिखा दिया गया। ऑडिट में इसे बोगस सर्वेक्षण माना गया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *