जैसे ही घड़ी ने 11:56 बजाए, मोहता चौक का माहौल अचानक बदल गया। ‘बोल नमः शिवाय’ के जयकारों के साथ विजया प्रेमियों की टोलियां सक्रिय हो उठीं। राह चलते लोग रुककर इस नजारे को देखने लगे। दरअसल, बीकानेर शहर में होली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि पांच दिन तक चलने वाला सांस्कृतिक उत्सव है। परकोटे के भीतर हर साल आयोजित होने वाला भांग सम्मेलन देशभर के रसियों को आकर्षित करता है। इसी कड़ी में मोहता चौक में आयोजन की शुरुआत हुई। 51 किलो भांग छानी, दूध-ड्राई फ्रूट से बनी खास ठंडाई
मोहता चौक में पहले भगवान शिव की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद करीब 51 किलो भांग छानी गई। दूध और ड्राई फ्रूट से तैयार विशेष ठंडाई ने माहौल को और रंगीन बना दिया। भांग का प्रसाद ग्रहण ही लोग ढोल की थाप पर थिरकते नजर आए, कहीं फिल्मी गीतों पर डांस हुआ। इस मौके पर पारंपरिक फाग के गीत भी गाए गए। इनमें ‘भांग का रंग जमा हो चकाचक…’ जैसे गीतों की गूंज से पूरा चौक होली के रंग में डूब गया। बीकानेर की होली में मस्ती के साथ आस्था भी घुली रहती है। यहां विजया का सेवन ‘बोल नमः शिवाय’ के जयकारों के बीच होता है। शिव भक्ति से जुड़ी यह परंपरा उत्सव को आध्यात्मिक रंग भी देती है। बनारस के बाद बीकानेर की पहचान
आयोजकों के अनुसार- भांग संस्कृति की चर्चा हो तो वाराणसी का नाम सबसे पहले आता है, लेकिन बीकानेर भी इस परंपरा में पीछे नहीं। यहां होली से करीब एक सप्ताह पहले ही आयोजन शुरू हो जाते है और धुलंडी पर भी विशेष आयोजन होते है। रंग, गुलाल, फाग और विजया की ठंडाई का खास संगम रहता है। परकोटे में होली समारोह शुरू
बीकानेर के परकोटे में मंगलवार शाम से ही होली की धूम शुरू हो गई। आज फक्कड़दाता की रम्मत बारह गुवाड़ चौक में होगी। इसके बाद अन्य चौक में भी रम्मत का आयोजन होगा। हर्षो और व्यासों के बीच पानी डोलची का खेल होगा। साथ ही होली के दिन हर्ष समाज का दूल्हा निकलेगा और जगह जगह महिलाएं उसका दूल्हे की तरह ही स्वागत करेगी।


