भास्कर न्यूज | जालंधर शहर में उद्योगों की नींव दो क्षेत्रों ने रखी थी। पहला- सोढल के साथ इंडस्ट्रियल एरिया। दूसरा- नेशनल हाईवे पर आज के पठानकोट बायपास चौक के पास इंडस्ट्रियल एस्टेट। नगर निगम दोनों एरिया की देखभाल करता है। रिहाइशी क्षेत्रों व पॉश कॉलोनियों से घिरे इंडस्ट्रियल एरिया का तो खूब विकास हुआ। लेकिन इंडस्ट्रीयल का इलाका पिछड़ गया है। तस्वीरें इंडस्ट्रियल एस्टेट में जमा गंदगी, बदहाल पार्क, कच्ची रोड्स व ब्लॉक सीवरेज की स्थिति को बयां कर रही हैं। इंडस्ट्रियल एस्टेट 1970 के दशक में बनी थी। वर्तमान में इसकी हदों पर अजय एस्टेट, सुंदर नगर व बुलंदपुर-रेरू जैसे इलाकों के कारखाने विकसित हुए हैं। इन कारखानों की तरक्की का रास्ता इंडस्ट्रीयल एस्टेट बनी थी। आज हालात जटिल हैं। यहां की इंडस्ट्रियल एस्टेट इंडस्ट्रियल वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सूबा सिंह कहते हैं- जब सुविधाएं मिलेंगी तो स्वभाविक ही इंडस्ट्री तरक्की करेगी। इससे पंजाब में रोजगार के नए मौके पैदा होंगे। हमारी डिमांड है कि मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाए। तमाम उद्यमी नगर निगम को प्रॉपर्टी टैक्स व सरकार को जीएसटी व इनकम टैक्स देते हैं। उनको सुविधाएं भी प्राथमिक आधार पर मिलनी चाहिएं।


