झारखंड में पर्यटन स्थलों को चार कैटेगरी-अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर बांटकर इसको विकसित करने की योजना है। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी एक-दो पर्यटन स्थलों को छोड़कर एक ईंट भी नहीं जोड़ी गई। कहीं शिलान्यास होकर रह गया तो कहीं डीपीआर बनने के बाद काम शुरू नहीं हो पाया। दरअसल पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए जिला संवर्द्धन समिति बनाई गई थी। इसने पर्यटन स्थल को चिह्नित कर योजना राज्य पर्यटन संवर्द्धन समिति को भेजा। इस योजना के तहत रांची में 25, धनबाद में 24 और जमशेदपुर में आठ पर्यटन स्थल को विकसित करना था। इसकी स्वीकृति के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। दैनिक भास्कर ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि पिछले तीन साल से किसी भी जिले में पर्यटन संवर्द्धन समिति को फंड ही नहीं दिया गया है। इससे जिला स्तर से भेजे गए प्रस्ताव पर्यटन विभाग और निदेशालय में अटके हुए हैं। जमशेदपुर: आठ स्थल विकसित करने हैं, केवल दो पर चल रहा काम पूर्वी सिंहभूम जिले में 8 पर्यटन स्थलों को विकसित करने की स्वीकृति पर्यटन एवं संवर्द्धन समिति ने दी थी। सरकार को प्रस्ताव भेजा गया। इसमें पोटका के मुक्तेश्वर धाम हरिणा मंदिर, घाटशिला स्थित बुरूडीह डैम, गालूडीह बराज, धारागिरी जल प्रपात व झरना, बासाडेरा, डुमरिया में लखाईडीह, पहाड़भांगा, छोटा बांकी डैम को पर्यटन स्थल बनाने का प्रस्ताव है। धनबाद : 24 स्थल विकसित होने हैं, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं धनबाद में 24 स्थलों को विकसित करने का प्रस्ताव दिसंबर 2021 में तैयार किया गया था। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल के रूप में मैथन, राष्ट्रीय पर्यटक स्थल में तोपचांची, राज्यस्तरीय पर्यटक स्थल में भटिंडा फॉल, बिरसा मुंडा पार्क धनबाद, पंचेत डैम, चरकखुर्द गरमकुुंड टुंडी, दलदली आश्रम व मां झोरबूढ़ी गरमकुंड कलियासोल, चिटाहीधाम बाघमारा, बूढ़ा बाबा शिव मंदिर झिंझीपहाड़ी को विकसित करना था। शेष पेज 11 पर अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, राजकीय व जिला स्तर पर विकसित करने थे पर्यटन स्थल, जानिए क्या है िस्थति… रांची में दशम, हुंडरू व जोन्हा फॉल, देवड़ी मंदिर और भगवान बिरसा बायोलॉजिकल पार्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना था। वहीं स्टेट म्यूजियम होटवार, पहाड़ी मंदिर, मैक्लुस्कीगंज, गेतलसूद डैम, जगन्नाथ मंदिर, पतरातू वैली, बायो डायवर्सिटी पार्क, सीता फॉल, हटिया डैम, कांके डैम, टैगोर हिल को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करना था। इसके अलावा सांई मंदिर, बड़ा तालाब, रॉक गार्डेन, मरासिली पहाड़ व क्रोकोडाइल पार्क राज्य स्तर पर और राधा कृष्णा मंदिर बोड़ेया, सिल्ली में नीलगिरी पहाड़ और स्वर्णरेखा नदी उद्गम स्थल को जिला स्तर पर विकसित किया जाना था। रांची: 25 स्थल विकसित होने थे, पहाड़ी मंदिर जीर्णोद्धार का शिलान्यास, बड़ा तालाब का टेंडर जारी पहाड़ी मंदिर का भी जीर्णोद्धार होना है यहां रोटरी पार्क बनना है। इसलिए विवेकानंद प्रतिमा तक जाने का रास्ता ही नहीं खुला अभी क्या स्थिति: 24 करोड़ रुपए की लागत से 28.1 हेक्टेयर पर दो साल में पार्क का निर्माण पूरा करने का दावा वन विभाग का था। लेकिन दो साल बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है। सरकार ने फंड नहीं दिया इस वजह से अन्य योजना पर काम शुरू नहीं हुआ। अभी क्या स्थिति: मैथन डैम और भटिंडा जलप्रपात को विकसित करने की योजना फाइलों में रह गई। भवन प्रमंडल के अनुसार डीवीसी से एनआेसी नहीं मिलने की वजह से योजना आगे नहीं बढ़ी। क्या हुआ: इसमें केवल हरिणा के पर्यटन स्थल को विकसित करने का काम शुरू हुआ। वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने हरिणा मंदिर (मुक्तेश्वर धाम) क्षेत्र को बायो डायवर्सिटी पार्क (जैव विविधता उद्यान) के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया है। क्या हुआ: प्रशासन ने जनवरी 2022 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल मैथन डैम व भटिंडा फॉल को विकसित करने की जिम्मेवारी भवन प्रमंडल विभाग धनबाद को दिया गया। जनवरी, 2022 में कंसल्टेंट ने भटिंडा फॉल के विकास के लिए 7.5 करोड़ और मैथन डैम के विकास के लिए 5.71 करोड़ की डीपीआर तैयार की। अभी स्थिति क्या: सीता फॉल में शौचालय का निर्माण अंतिम चरण में है। ओरमांझी शहीद स्थल का काम पूरा हो गया है, इसका जल्द उद्घाटन होगा। पहाड़ी मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास पिछले माह किया गया है। अभी एक ईंट नहीं जोड़ी गई। बड़ा तालाब रोटरी पार्क के निर्माण की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई है। टेंडर निकाला गया है। हुआ क्या: जिला संवर्द्धन समिति ने 2020 में इसकी स्वीकति दी। 2021 में राज्य सरकार से एक करोड़ रुपए मिले। इससे सीता फॉल में शेड, शौचालय सहित अन्य काम कराए गए। इसके बाद से सरकार ने फंड ही नहीं दिया। पहाड़ी मंदिर का जीर्णोद्धार 6.73 करोड़ से, बड़ा तालाब के पास रोटरी पार्क का निर्माण 2.50 करोड़ से, ओरमांझी शहीद स्थल का सौंदर्यीकरण, हुंडरू फॉल, गेतलसूद में कम्युनिटी हॉल, चाइल्ड एरिया विकसित करने और लापुंग में घघारी फॉल को विकसित करने की योजना बनी थी।


