डेढ़ महीने बाद एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू होने वाला है। लेकिन बीकानेर जिले में जर्जर स्कूलों के हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद राज्य सरकार ने स्कूलों की दशा सुधारने के लिए आदेश पर आदेश जारी किए। लेकिन क्षतिग्रस्त स्कूलों के निर्माण के लिए बजट नहीं मिलने के कारण स्कूलों के हालात अभी भी खस्ताहाल है। ‘भास्कर टीम’ ने शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शिक्षा विभाग के आदेश पर 57 सरकारी स्कूलों में जर्जर कक्षा कक्ष जमींदोज कर दिए गए। लेकिन नए कक्षा कक्षा के निर्माण के लिए प्राप्त बजट देने की जगह मरम्मत के नाम पर जिले के 56 स्कूलों को 4.70 करोड़ का बजट मंजूर हुआ। लेकिन यह बजट अभी तक अनेक स्कूलों को प्राप्त ही नहीं हुआ है। यही स्थिति राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पाबू पाठशाला की है। पाबू पाठशाला में शिक्षा विभाग ने छह जर्जर कक्षा कक्ष को जमींदोज किया है। स्कूल की चार दीवारी और अन्य मरम्मत कार्य के लिए 10 लाख रुपए मंजूर हुए हैं। लेकिन बोर्ड परीक्षा शुरू हो जाने के कारण यह बजट फिलहाल स्कूल को नहीं मिला है। स्कूल में अब मरम्मत का कार्य बोर्ड परीक्षा के बाद करवाया जाएगा। फिलहाल स्कूल के पहली से आठवीं कक्षा के 120 विद्यार्थियों की कक्षाएं केवल चार कमरों में संचालित की जा रही है। यह हालत केवल एक- दो स्कूलों के नहीं है। जिले में 120 सरकारी स्कूल जर्जर है। वहीं जिले की विभिन्न सरकारी स्कूलों में 1971 कक्षा- कक्ष ऐसे है जहां बच्चों को बैठना खतरे से कम नहीं है। 1. बजट कम, नहीं हुआ काम, स्कूल जर्जर राउप्रावि अंबेडकर कॉलोनी के बच्चे आज भी जर्जर स्कूल भवन में ही पढ़ रहे हैं। स्कूल भवन निर्माण के लिए लगभग 12 लाख रुपए की जरूरत है। लेकिन बजट 4.92 लाख रुपए का ही स्वीकृत हुआ। ऐसे में स्कूल की मरम्मत का काम नहीं हुआ। दोबारा बजट के प्रस्ताव राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद को भेजें गए हैं। 2. चार कमरे जमींदोज, नए कक्ष का निर्माण नहीं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जैलवेल में क्षतिग्रस्त चार कक्षा – कक्ष को जमींदोज कर दिया गया है। लेकिन नए कक्षा – कक्ष के निर्माण के लिए स्कूल को अभी तक बजट नहीं मिला है। हालात यह है कि 11 कक्षाएं 6 कमरों में संचालित हो रही है। स्कूल प्रशासन की ओर से भामाशाह के सहयोग से दो कमरों का निर्माण करवाया जा रहा है। 3. किराए के भवन की मरम्मत नहीं, स्कूल शिफ्ट राबाउमावि भगवानपुरा किराए के भवन में चल रही थी। भवन मलिक ने लंबे समय तक स्कूल में मरम्मत का कार्य नहीं करवाया। वहीं किराए की बिल्डिंग में विभाग की ओर से बजट का प्रावधान नहीं होने के कारण शिक्षा विभाग ने इस स्कूल को अब राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छींपों का मोहल्ला में शिफ्ट कर दिया है। 32 स्कूल किराए की बिल्डिंग में संचालित, मरम्मत का बजट नहीं, तीन स्कूल शिफ्ट…अब नए भवन की तलाश बीकानेर जिले में लगभग 32 सरकारी स्कूल किराए की बिल्डिंग में चल रहे हैं। किराए के भवनों में संचालित स्कूलों में मरम्मत और निर्माण कार्य के लिए शिक्षा विभाग की ओर से बजट का प्रावधान नहीं है। भवन मालिक के भरोसे ही स्कूल की रिपेयरिंग का जिम्मा है। भवन मालिक की ओर से लंबे समय से मरम्मत का कार्य नहीं कराए जाने के कारण किराए की बिल्डिंग में चल रहे भगवानपुरा स्कूल सहित राप्रावि कोरिया का बास नंबर एक, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भीम नगर को अन्य स्कूलों में शिफ्ट किया गया है। विभाग की ओर से इन स्कूलों के लिए नए भवन की तलाश की जा रही है। 15 मार्च तक फिर स्कूलों का सर्वे करने के निर्देश उधर, पिछले दिनों सरकारी स्कूलों के हालात को लेकर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने अब दोबारा प्रदेश जर्जर, क्षतिग्रस्त और जीर्ण-शीर्ण सरकारी स्कूल भवनों का सर्वे करवाने का फैसला लिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस संबंध में सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी कर सर्वे टीम की ओर से 15 मार्च तक जर्जर स्कूलों का सर्वे करवाकर रिपोर्ट राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद को भिजवाने के निर्देश दिए हैं। स्कूल शिक्षा परिषद आयुक्त अनुपमा जोरवाल से बातचीत Q|जर्जर स्कूल की स्थिति में सुधार को लेकर क्या योजना है? A| बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले है। जर्जर और क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों को शिफ्ट किया गया है। अब शिक्षा निदेशालय की ओर से जर्जर स्कूलों का फिर से सर्वे करवाया जा रहा है। प्रायोरिटी के आधार पर जहां नामांकन अधिक है उन स्कूलों में नए कक्षा कक्ष का निर्माण कराया जाएगा। Q |किराए की बिल्डिंग में चल रहे स्कूल भी क्षतिग्रस्त है। क्या कहेंगे? A| किराए की बिल्डिंग में शिक्षा विभाग की ओर से बजट का प्रावधान नहीं है। लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जो स्कूल जर्जर है उन्हें अन्य जगह शिफ्ट किया गया है। नए भवन की भी तलाश की जा रही है।


