चित्तौड़गढ़ वन विभाग की टीम ने लगभग 6 टन खैर की लकड़ियों से भरा ट्रैक्टर-ट्राली जब्त किया। साथ ही एस्कॉर्ट कर रहे एक स्कॉर्पियो गाड़ी और दो मोटरसाइकिल भी जब्त की। मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जबकि 4 से 5 तस्कर स्कॉर्पियो में बैठकर भाग निकले। फरार आरोपी गाड़ी को एक मकान के बाहर छोड़कर भागे थे। यह सभी तस्कर इन लकड़ियों को घटियावली वन क्षेत्र से काटकर इकट्ठा कर रहे थे। इन लकड़ियों की कीमत लगभग 10 लाख रुपयों की बताई जा रही है। तीन तस्कर हुए गिरफ्तार रेंजर राजेंद्र शर्मा ने बताया कि पिछले 10-15 दिनों से घटियावली वन क्षेत्र में खैर की लकड़ियों के काटने की शिकायत मिल रही थी। डीएफओ विजय शंकर पांडेय के निर्देश पर एक टीम का गठन किया गया। तीन लगातार चार दिनों से वन क्षेत्र में नजर बनाए रखी थी। तस्करों पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। इसी दौरान सुबह करीब 5 बजे वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो वहां पर कई जने लकड़ियां एक ट्रैक्टर-ट्राली में भर रहे थे। मौके पर ही तीन आरोपी अरनिया पंथ निवासी अंकित वैष्णव (21), कुम्भानगर निवासी ओंकार शर्मा (22) और नेतवाल निवासी रतन भांभी (45) पकड़े गए। वहीं पर स्कॉर्पियो और दो बाइक भी थी। 4 से 5 तस्कर स्कॉर्पियो में बैठकर मौके से भाग निकले। टीम के कुछ सदस्य उसके पीछे गए तो रामचौक के पास एक मकान के बाहर स्कॉर्पियो खड़ी हुई दिखाई थी। उसमें बैठे सभी आरोपी गाड़ी को वहीं छोड़कर भाग निकले थे। ट्रैक्टर-ट्राली के अलावा भी पास में लकड़ियां पड़ी हुई थी। जिसे सरकारी वाहन में भरकर ऑफिस लाया गया। तौल करने पर 6 टन से ज्यादा की खैर की लकड़ियां थी, जिसका मार्केट वैल्यू लगभग 10 लाख रुपए की थी। स्कॉर्पियो गाड़ी में लगी हुई थी पीले और नीली लाइट्स स्कॉर्पियो गाड़ी में उदयपुर पासिंग का एक नंबर प्लेट पीछे की तरफ रखा हुआ था। उसने पीली बत्ती भी रखी हुई थी और तलवार भी रखा हुआ था। गाड़ी के आगे की तरफ भी नीली और पीली लाइट्स थी, जिससे आगे से किसी अधिकारी की गाड़ी लगे। बताया जा रहा है कि इन लकड़ियों की सप्लाई दिल्ली और यूपी की तरफ किया जाना था। हालांकि वन विभाग की टीम आरोपियों से अभी भी पूछताछ कर रही है। कार्रवाई करने वाली इस टीम में वनपाल भूपेंद्र खटीक, सहायक वनपाल विशाल मीणा, तेज सिंह शक्तावत, वनरक्षक महावीर, रतिराम, झूमर राम, पंकज वैष्णव सहित कई वनकर्मी शामिल थे। लेपर्ड के नजरों से बचे वनकर्मी वन विभाग की टीम पिछले चार रातों से झाड़ियां में छुपकर तस्करों पर निगरानी रख रही थी। तीन-तीन की चार टुकड़ियों में टीम बनाई गई थी। इस दौरान दो दिन पहले ही इस क्षेत्र में दो लेपर्ड भी नजर आए। जो नीलगाय के पीछे भाग रहे थे। यह लेपर्ड बैंड कर्मियों से सिर्फ 10 फीट की दूरी पर ही थे। गनीमत रही की लेपर्ड का फोकस नीलगाय पर था, इसीलिए वन कर्मियों को किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।


