6 महीने की बच्ची के सीने में फंसा कीड़ा:फेफड़े हुए ब्लॉक, डेढ़ साल के बच्चे ने निगला चिकन का टुकड़ा; देर रात हुई 2 सर्जरी

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग ने दो बच्चों की जटिल सर्जरी कर उन्हें नया जीवन दिया। दोनों बच्चे कटनी और दमोह जिलों के रहने वाले हैं। अब दोनों की हालत खतरे से बाहर है। दरअसल, एक बच्ची के सीने में कीड़ा फंसा था, जबकि दूसरे के गले में चिकन का टुकड़ा फंस गया था। ऐसे में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी देर रात ईएनटी विभाग की प्रमुख डॉ. कविता सचदेवा और उनकी टीम ने दोनों ही बच्चों की सफल सर्जरी की। दोनों बच्चे मेडिकल कॉलेज के शिशु वार्ड में भर्ती हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं। एक बच्चे की उम्र डेढ़ साल है, जबकि दूसरे की छह महीने। फेफड़ों में हवा नहीं जा रही थी, पीले रंग का कीड़ा निकला दमोह जिले की रहने वाली 6 महीने की बच्ची के सीने में सोमवार को अचानक तेज दर्द हुआ, जिससे वह लगातार रोने लगी। परिजन उसे दमोह जिला अस्पताल लेकर गए, लेकिन वहां डॉक्टरों को स्थिति साफ नहीं हो सकी। इसके बाद बच्ची को जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। शिशु वार्ड में उसे भर्ती किया गया। बच्ची को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। परिजनों ने बताया कि सुबह 10 बजे वह खेलते-खेलते अचानक रोने लगी। ईएनटी विभाग की प्रमुख डॉ. कविता सचदेवा ने जांच की तो पाया कि फेफड़े में हवा नहीं जा रही थी और वह गुब्बारे की तरह फूल रहा था। रात को बच्ची को ऑपरेशन थिएटर ले जाकर एनेस्थीसिया दिया गया। सर्जरी के दौरान मशीन से देखने पर सीने में पीले रंग का एक कीड़ा फंसा हुआ मिला, जिसे ऑपरेशन कर बाहर निकाला गया। सीने को कर दिया था ब्लॉक डॉ. कविता सचदेवा ने बताया कि संभवतः खेलते समय उड़ता हुआ कीड़ा बच्ची के मुंह में चला गया, जो सांस के साथ फेफड़ों की दाईं ओर जाकर फंस गया। इससे फेफड़ा ब्लॉक हो गया और बच्ची को सांस लेने में परेशानी होने लगी। अब बच्ची पूरी तरह ठीक है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। बच्ची के ठीक होने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। चिकन का टुकड़ा सांस नली में फंसा, सर्जरी से निकला
सोमवार रात को ही कटनी से डेढ़ साल के एक बच्चे को जबलपुर मेडिकल कॉलेज के ईएनटी वार्ड में भर्ती किया गया। बच्चा लगातार रो रहा था। पहले उसे कटनी जिला अस्पताल ले जाया गया, वहां से जबलपुर रेफर किया गया। जब उसकी जांच की गई, तो पाया गया कि सांस की नली में कुछ फंसा हुआ है। सर्जरी के दौरान बच्चे के सीने से करीब एक सेंटीमीटर का चिकन का टुकड़ा निकाला गया, जिसे खाते समय वह निगल गया था। डॉक्टर की सलाह – रखें यह सावधानी
ईएनटी प्रमुख डॉ. कविता सचदेवा ने बताया कि यदि समय पर दोनों बच्चों को मेडिकल कॉलेज नहीं लाया गया होता, तो उनकी जान बचाना मुश्किल था। छह माह की बच्ची की स्थिति अधिक गंभीर थी, क्योंकि सीने में कीड़ा फंसने से उसकी सांस उखड़ रही थी। कुछ देर और हो जाती तो जान जाना तय थी। दमोह के सिमरिया गांव की बच्ची को सोमवार रात को जबलपुर लाया गया और रात में ही दूरबीन सर्जरी की गई। वहीं, कटनी से आए डेढ़ साल के बच्चे की भी रात 3 बजे सर्जरी की गई। डॉ. कविता ने परिजनों को सलाह दी है कि छोटे बच्चों को कठोर या छोटे कणों वाले खाद्य पदार्थ न दें। साथ ही बच्चों पर हमेशा नजर रखें और उन्हें कभी अकेला न छोड़ें। ये खबर भी पढ़ें… बच्चा खा रहा मिट्टी-बर्फ, हो सकता है PICA:क्या है यह दुर्लभ बीमारी, समय रहते इलाज न लेना जानलेवा हो सकता है भारत में छोटे बच्चों का मिट्टी खाना और दीवार का प्लास्टर खुरचकर खाना आम मान लिया जाता है। ज्यादातर ये लक्षण सामान्य होते भी हैं। लेकिन दो साल से अधिक उम्र के बच्चे लंबे समय तक ऐसा कर रहे हैं तो इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। क्योंकि तब तक बच्चों का टेस्ट बड डेवलप हो चुका होता है। उन्हें लगभग हर चीज का स्वाद पता होता है, ऐसे में नॉन न्यूट्रिटिव चीजें खाना दुर्लभ बीमारी PICA के लक्षण हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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