भास्कर न्यूज | अमृतसर पीएमआईडीसी ने शहर की करीब 4 लाख प्रॉपर्टीज का सटीक आंकड़ा जुटाने के लिए प्राइवेट कंपनी को 6 माह ठेका दिया था। कांट्रेक्ट खत्म होने में 12 दिन बचे हैं और महज 52 हजार प्रॉपर्टीज का डोर-टू-डोर सर्वे कराया जा सका है। वहीं, सर्वे को लेकर समय-सीमा बढ़ाने की तैयारी है। हालांकि, जिस रफ्तार से सर्वे कराया गया, करीब 4 साल लगने तय हैं। चूंकि समय-सीमा बढ़ाने की बजाए टीम की संख्या पर फोकस करना जरूरी है। 20 से 30 मुलाजिमों को डोर-टू-डोर सर्वे में लगाया जाता रहा है जिसका परिणाम यह देखने को मिला कि सर्वे फेल हो गया। सर्वे रिपोर्ट का 10% काम निगम को चेक करने के लिए कंपनी को सौंपना था। जिसके तहत अब 6 हजार की डिटेल सौंपी जा सकी है। निगम की टीम को चेक करने में ही 10 दिन बीत जाएंगे। इधर 19 मार्च को टेंडर की डेडलाइन खत्म हो रही है। निगम के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से यह टेंडर लगाया गया। ऐसे में दूसरी कंपनी को दोबारा से सर्वे के लिए लाया गया तो फिर से इतनी ही रकम खर्चनी पड़ेगी। ऐसे में प्लान किया जा रहा कि प्रॉपर्टीज का सर्वे पूरा कराए जाने को लेकर समय-सीमा बढ़ा दी जाए। फिलहाल, अब तक किया गया काम भगवान भरोसे ही देखने को मिला है। 12 दिन में 2 रविवार निकल जाएंगे तो 10 दिन ही सर्वे के लिए बच रहे। जिस अवधि में 3.48 लाख प्रापर्टियों तक पहुंच बनाना होगा जो असंभव है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि 2013-14 में 3.58 लाख संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग फेल हुआ तो उससे सबक उच्च अफसरों ने नहीं लिया। सवाल यह है कि चंडीगढ़ से सीधे टेंडर निकाला गया है, अब सर्वे फेल होने की जिम्मेदारी कौन लेगा। इधर निगम में तैनात अफसरों ने भी हाथ खड़े कर लिए हैं। यह बात अलग है कि उच्च अफसरों की निर्णय पर चुप रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। गौर हो कि बीते सितंबर 2025 में शहर की सभी संपत्तियों जैसे घर, व्यावसायिक और आवासीय इमारतें, दुकानें, फैक्ट्रियां आदि की डिजिटल मैपिंग के लिए जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) सर्वे शुरू कराया गया। समय पर काम कंपलीट कराने को लेकर देखरेख के लिए पीएमआईडीसी विभाग में कार्यरत अर्बन प्लानर मनि शर्मा को बतौर इंचार्ज जिम्मेदारी सौंपी गई थी।


