जहां आज कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागतऔर रसायनों के उपयोग से लोगपरेशान हैं, वहीं बसना के ग्राममिलाराबाद के किसान अंतर्यामी प्रधानने एक नई राह दिखाई है। परंपरागतज्ञान और आधुनिक नवाचार कोजोड़कर उन्होंने सिद्ध कर दिया है किजैविक खेती न केवल सुरक्षित है,बल्कि आर्थिक रूप से रासायनिक खेतीसे कहीं अधिक लाभदायक है। उनकीचर्चा छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्किराजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों मेंभी हो रही है। अंतर्यामी प्रधान अपनी कुल 65एकड़ कृषि भूमि पर पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं। वे बताते हैं कि उनके पूर्वज भी रसायनों के खिलाफथे। उनकी 21 एकड़ जमीन पर तोआज तक कभी यूरिया या डीएपी डलाही नहीं। आज वे काला नमक, चिन्नौर, दुबराज और काली मूंछ जैसी दुर्लभऔर कीमती धान की किस्मों का संरक्षण और उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने अपने उत्पादों को अपनी दादी की स्मृति मेंदादी श्रीमोती ब्रांड नाम दिया है। रसायनमुक्त भोजन के कारण उनकेपरिवार का मेडिकल खर्च बहुत कम हैऔर परिवार के सदस्य 100 वर्ष सेअधिक की आयु तक स्वस्थ जीवन जीचुके हैं। इसके साथ ही, वे स्थानीय स्तरपर 10 लोगों को सालभर और सीजनके दौरान 20-25 लोगों को प्रतिदिनरोजगार भी दे रहे हैं। वे खरीफ सीजनमें धान की 9 उन्नत और सुगंधितकिस्मों की खेती करते हैं। जबकि रबी मेंगेहूं, मूंग, उड़द, अरहर और गन्ना जैसीफसलें लेते हैं। जैविक विधि से भी धानकी औसत उपज 18 से 22 क्विंटलप्रति एकड़ मिल रही है, जो रासायनिकखेती की उपज के बराबर है। जैविकखेती ने किसान की आर्थिक स्थिति कोपूरी तरह बदल दिया है। जहांरासायनिक खेती में प्रति एकड़ 20-25हजार खर्च होते हैं, वहीं जैविक में यहखर्च मात्र 5 से 7 हजार रुपए है। वेबताते हैं कि उनका सुगंधित काला नमकचावल 350 रुपए प्रति किलो तकबिकता है। उनसे प्रेरित होकर आसपासगांव के किसान भी खेती कर रहे है। किसान अंतर्यामी बताते हैं कि उनकीजैविक खेती सफल इसलिए भी है,क्योंकि उनके पास 60 गौवंश हैं, जोखेती के लिए रीढ़ की हड्डी का कामकरते हैं। इन पशुओं के गोबर से प्रतिवर्ष250-270 ट्रॉली जैविक खाद तैयारहोती है। इसके अलावा गौमूत्र, नीम,धतूरा और सीताफल की पत्तियों से वेप्राकृतिक कीटनाशक ब्रह्मास्त्र बनाते हैं,जिससे फसल पूरी तरह रोगमुक्त रहतीहै। खेती के साथ-साथ प्रतिदिन 30लीटर तक दूध उत्पादन, बकरी, भेड़,मुर्गी और बत्तख पालन से उन्हें सालभरआय होती है। किसान प्रधान बताते हैं कि अगर सहीतकनीक अपनाई जाए, तो खेती सबसेमुनाफे का सौदा है। गुणवत्ता इतनी शुद्धहै कि उन्हें मंडी जाने की जरूरत नहींपड़ती, बिलासपुर और सरायपाली तकके ग्राहक सीधे उनके घर आकरचावल, दाल और गुड़ खरीदते हैं। वेकाला नमक, दुबराज, चिन्नौर और शाहीनमक जैसी धान की 9 उन्नत किस्मों कीखेती करते हैं।


