भास्कर न्यूज | कोरबा 7 महीने में दूसरी बार बुधवार को लेबर कोड बिल के विरोध में एसईसीएल में हड़ताल हुई है। इसके पहले साल 2025 में 9 जुलाई को लेबर कोड बिल को वापस लेने और कोल इंडिया में निजीकरण का बढ़ावा देना बंद करने कामबंद हड़ताल कर चुके हैं। मांगें पूरी नहीं होने पर यूनियनों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है। श्रम संघों का दावा है कि 80 फीसदी से ज्यादा हड़ताल में शामिल हुए। वहीं एसईसीएल प्रबंधन ने कहा है कि सामान्य दिनों की तुलना में हड़ताल के दिन उपस्थिति में 34 फीसदी की कमी आई है। यह जनरल शिफ्ट व पहली पाली के रिकॉर्ड के आधार पर है। देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में चार ट्रेड यूनियन एचएमएस, इंटक, एटक व सीटू की संयुक्त मोर्चा ने एसईसीएल की कोयला खदानों के एंट्री पाइंट के बाहर डटे रहे। कर्मचारियों से हड़ताल पर समर्थन मांगते नजर आए। केन्द्र सरकार के इसी साल अप्रैल से देश में लागू किए जा रहे लेबर कोड बिल से कोयला कामगारों को होने वाले नुकसान की जानकारी देते रहे और कार्यस्थल पर पहुंचे कर्मचारियों को समझाइश देकर लौटाया। जनरल शिफ्ट के साथ ही तीन पालियों में एसईसीएल की कोयला खदानों में कामगारों की ड्यूटी लगाई जाती है। इन पालियों के शुरू होने से पहले श्रमिक नेताओं का जमावड़ा खदानों के बाहर देखने को मिला, ताकि हड़ताल को सफल बना सकें। दूसरी ओर खुली खदानों के कोयला उत्पादन को प्रभावित होने से रोकने एसईसीएल ने खनन ऑपरेटरों की इमरजेंसी ड्यूटी लगा रखी थी। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने देशव्यापी हड़ताल को समर्थन दिया। संगठन से जुड़े बिजली कर्मियों ने काली पट्टी लगाकर काम किया और लेबर कोड बिल को वापस लेने की मांग की। केन्द्र सरकार के विद्युत अधिनियम में संशोधन विधेयक पारित करने की तैयारी का भी विरोध जताया। दर्री जोन कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन में यूनियन के प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी, प्रांतीय महासचिव अजय बाबर, सम्मेलाल श्रीवास, घनश्याम गबेल, लक्ष्मी प्रसाद यादव, कुशल सोनवानी समेत अन्य शामिल हुए।


