कोंडागांव में सात दिवसीय पारंपरिक मंडई मेले की शुरुआत हो गई है। यह मेला अपनी 700 साल पुरानी विरासत के लिए जाना जाता है। फागुन पूर्णिमा के पहले मंगलवार को ग्रामीण इसका निमंत्रण देने आम के पत्ते लेकर निकले। मेले की शुरुआत से पहले ग्राम के कोटवार, पटेल और पुजारी देवी-देवताओं से अनुमति लेते हैं। इसके बाद आम के पत्तों और टहनियों को लेकर व्यापारियों को मेले का न्योता देने निकलते हैं। आज मेले में आसपास की 22 पालियों के देवी-देवताओं को भी निमंत्रण दिया जाएगा। विदेशी पर्यटक भी होते है शामिल मेले के पहले दिन देवी-देवताओं की विशेष परिक्रमा होती है। इस परिक्रमा में जिले के कलेक्टर, एसपी और जनप्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। बस्तर की समृद्ध संस्कृति को देखने के लिए विदेशी पर्यटक भी इस मेले में पहुंचते हैं। कोंडागांव का नाम पहले कोन्डनार था स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब कोंडागांव को कोन्डनार के नाम से जाना जाता था, तब से यह परंपरा चली आ रही है। आम के वृक्ष की पूजा कर उसकी पत्तियां और टहनियां तोड़ी जाती हैं। बस्तर में आम के पत्तों का विशेष महत्व है। यह मेला बस्तर की संस्कृति और परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। मेला परिसर की परिक्रमा बता दें कि मंडई मेले की शुरुआत सोमवार से हुई। जहां गांव के प्रमुख पटेल और कोटवार एकत्रित होकर देवी-देवताओं को आमंत्रित किया। मंगलवार को देवी-देवताओं का आगमन होगा। सभी देवी-देवता ग्राम देवी के गुड़ी मंदिर में एकत्रित होते हैं। इसके बाद मेला परिसर की परिक्रमा की जाती है।


