कस्बे के एकमात्र सरकारी कॉलेज का नवीन भवन निर्माण के कुछ ही समय बाद क्षतिग्रस्त होने लगा है। भवन को सहारा देने वाले कई पिलरों में करीब आधा इंच तक दरारें आ चुकी हैं। ऐसे में बीए, बीएससी और कृषि विज्ञान में अध्ययनरत 782 विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। अल्पसंख्यक विभाग की ओर से डीग रोड स्थित शहीद जीतराम राजकीय महाविद्यालय के नवीन भवन निर्माण के लिए करीब 6 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे। पीडब्लूडी ने ठेकेदार के माध्यम से प्राचार्य कक्ष, स्टाफ रूम, कार्यालय, एनएसएस कक्ष, 8 कक्षा-कक्ष, आईसीटी, चित्रकला व भूगोल लैब के साथ महिला-पुरुष शौचालयों का निर्माण कराया। भवन को वर्ष 2024 में बिना यूसी, सीसी और सुरक्षा प्रमाण पत्र के ही संचालित कर दिया गया। पीडब्ल्यूडी को 7 बार पत्र लिख चुके प्राचार्य, बिना सुरक्षा प्रमाण पत्र शुरू हुआ था भवन ठेकेदार कार्य अवधि समय पूरा होने पर एसडी राशि के इंतजार में करीब 10 प्रतिशत यानी 60 लाख रुपए की सिक्योरिटी डिपॉजिट (एसडी) राशि जमा रहती है। गारंटी अवधि में भवन जर्जर होने पर यह राशि जब्त की जा सकती है। महाविद्यालय का भवन 2024 में बनकर तैयार हुआ था और वर्ष 2027 तक गारंटी अवधि में है। महाविद्यालय द्वारा बार-बार पत्राचार करने के बावजूद पीडब्लूडी अधिकारी भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में ठेकेदार भी गारंटी अवधि पूरी होने की प्रतीक्षा में है ताकि 60 लाख की एसडी राशि वापस प्राप्त कर सके। दरारें, फर्श धंसने और चारदीवारी झुकने से खतरा मुख्य द्वार के पास स्थित पिलर दरारों के चलते कमजोर हो रहे हैं। सीमेंट झड़ने से टाइल गिरने लगी हैं और दीवारें बदरंग हो रही हैं। कई जगह फर्श धंसने लगा है। कॉलेज परिसर की चारदीवारी भी एक तरफ झुक गई है, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। कॉलेज में आरओ प्लांट और वाटर कूलर अभी तक शुरू नहीं हो पाए हैं, जिससे विद्यार्थियों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है। खेल मैदान के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजरने के कारण छात्र-छात्राएं खेल गतिविधियों से भी वंचित हैं। “महाविद्यालय के नवीन भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पीडब्लूडी को 7 बार पत्र लिखे जा चुके है। साथ ही दो बार अल्पसंख्यक विभाग को पत्राचार किया जा चुका है। लेकिन विभागीय अधिकारी भवन की सुरक्षा को लेकर अनदेखी करने में लगे है। जिससे विद्यार्थियों की जान को खतरा बना हुआ है।” – डॉ. रामजीत यादव, प्राचार्य


