यह एक ऐसी कहानी है, जो एक कप चाय छोड़ने से शुरू होती है और गायों के लिए अस्पताल निर्माण तक पहुंच जाती है। इसे स्थानीय लोग अब जीवंत माता का मंदिर कहते हैं। वह कोरोना महामारी का दौर था। कोटा से करीब 50 किलोमीटर दूर सांगोद के छोटे से कस्बे में आठ दोस्त रोज शाम को चाय की दुकान पर जमा हुआ करते थे। महज 80 रुपए की वह चाय उनकी रोजमर्रा की खुशी थी। जब कोरोना महामारी का दौर खत्म हुआ तब उन्होंने फैसला किया कि हम अपनी चाय छोड़कर उन पैसों से किसी जरूरतमंद की मदद करेंगे। शुरू में लोगों की मदद की। फिर उन्होंने मिलकर पैसे इकट्ठा करने शुरू किए। कोई 10-20 रुपए, कोई 50, कोई 100… किसी दिन और भी ज्यादा। चाय छोड़कर इकट्ठा किया जा रहा पैसा अब हजारों में जुटाया जाने लगा। गायों के लिए आईसीयू और जनरल वार्ड भी बनाए गए हैं
यहां गायों के लिए आईसीयू और जनरल वार्ड भी हैं। जब कोई बीमार या घायल गोवंश यहां लाया जाता है तो पहले उसे आईसीयू में रखते हैं। हालत सुधरती है तब जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाता है। रात के दो बजे भी कोई फोन आता है कि कहीं कोई गाय घायल पड़ी है। बहुत तकलीफ में है तो तुरंत गाड़ी निकल पड़ती है। जब गाय पूरी तरह स्वस्थ हो जाती है, तब उसे नगर पालिका गोशाला में भेजा जाता है।
-सुनील सुमन, इंचार्ज, कृष्ण दरबार गो सेवा संस्थान


