भास्कर न्यूज|बालोद लगभग 8 साल से पत्नी से अलग रहने वाले पति ने कुटुंब न्यायालय में तलाक के लिए याचिका दायर किया था। जिसे न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। न्यायाधीश पारीक ने स्पष्ट किया कि अपने ही गलत आचरण का लाभ लेकर तलाक की मांग स्वीकार्य नहीं है। वैवाहिक विवाद में स्पष्ट किया कि कोई भी पक्ष अपने ही गलत आचरण का लाभ उठाकर विवाह-विच्छेद की मांग नहीं कर सकता। पत्नी 8 वर्ष से अलग निवासरत है। इस कारण तलाक की मांग पति ने की थी। पत्नी ने अधिवक्ता बालोद निवासी भेष कुमार साहू के माध्यम से जवाब पेश कर बताया कि विवाह के बाद पति का एक महिला पुलिसकर्मी से संबंध है। 10 साल की बेटी है। इस कारण मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और वह 8 साल से अलग रहने मजबूर हुई। पति ने अलगाव का आधार लेकर तलाक की याचिका दायर की थी। जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किया। न्यायालय ने कहा कि यदि विवाद का कारण स्वयं पति का विवाहेतर आचरण है तो वह उसी आधार पर तलाक नहीं मांग सकता। केवल लंबे समय से अलग रहना तलाक का स्वतः आधार नहीं है; वैधानिक क्रूरता सिद्ध होना आवश्यक है। कानूनी बिंदु: विवाहेतर संबंध से उत्पन्न मानसिक क्रूरता सिद्ध होने पर ही राहत दी जा सकती है।


