भीलवाड़ा के आसींद में बेटों ने 80 साल की नेत्रहीन मां को कांवड़ में बैठाकर 15 किलोमीटर पैदल यात्रा की। वे मां को सागनी गांव स्थित आंजना देव मंदिर लेकर गए। दरअसल, सोहनी देवी की आंखों की रोशनी 5 साल पहले चली गई थी। उनकी लंबे समय से आंजना देव मंदिर में दर्शन की इच्छा थी। इस इच्छा को पूरी करने के लिए बेटा अहमदाबाद से बांस की विशेष कांवड़ लेकर आया। उसे झूले जैसा आरामदायक बनाया। पिता की मौजूदगी का एहसास कराने के लिए उनकी तस्वीर भी रखी गई। बेटों का कहना है कि मां की इच्छा हमारे लिए आदेश के समान है। इसलिए मां की इच्छा को आदेश मानते हुए पूरे सम्मान के साथ उन्हें मंदिर लेकर गए। देखिए, कांवड़ यात्रा की PHOTOS… मां को कांवड़ में बैठाकर 15 किमी पैदल यात्रा की
दूधिया गांव निवासी भंवर नाथ (35) अपने भाइयों और बेटों के साथ मां सोहनी देवी को कांवड़ में बैठाकर 15 किलोमीटर पैदल आंजना देव मंदिर गए। इस यात्रा में भंवर नाथ के साथ उनकी पत्नी फूली देवी (33), जुड़वां बेटे करण नाथ (13), अर्जुन नाथ (13), भाई प्रेमनाथ (50) व जीवराज नाथ (48) और प्रेमनाथ का बेटा प्रहलाद नाथ (27) भी शामिल थे। पूरा परिवार गाजे-बाजे के साथ श्रद्धा के माहौल में दूधिया गांव से सागनी गांव तक पैदल पहुंचा। सोहनी देवी के पति उदय नाथ का 32 साल पहले हार्ट अटैक से निधन हो चुका था। परिवार ने उनकी तस्वीर भी कांवड़ में साथ रखी और मंदिर में उनके नाम से भी दर्शन कराए। अहमदाबाद से बनाकर लाया बांस की कांवड़
भंवर नाथ ने बताया- मां की इच्छा हमारे लिए आदेश है। जब उन्होंने दर्शन की इच्छा जताई तो हमने तय किया कि चाहे जितनी भी मेहनत करनी पड़े, उनकी इच्छा अवश्य पूरी करेंगे। भंवर नाथ ने बताया कि मां की इच्छा को पूरा करने के लिए अहमदाबाद से बांस की कांवड़ बनाकर लाया।


