हिमाचल भाजपा का CM पर शिक्षा के राजनीतिकरण का आरोप:प्रवक्ता जम्बाल बोले- कांग्रेस सरकार बच्चों की किताबों से कर रही राजनीति

हिमाचल प्रदेश में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जम्बाल ने स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा के एक बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। डॉ. शर्मा ने सार्वजनिक मंच पर कहा था कि कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किए जाएंगे। “कांग्रेस सरकार बच्चों की किताबों से कर रही राजनीति” — जम्बाल
राकेश जम्बाल ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक, गैर-जिम्मेदाराना और पूरी तरह से राजनीतिक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान स्वयं सिद्ध करता है कि कांग्रेस सरकार अब बच्चों की किताबों को अपनी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार-पत्र बनाने पर तुली हुई है। मुख्यमंत्री सुक्खू पर लगाया सुनियोजित एजेंडे का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि यह केवल बोर्ड अध्यक्ष का व्यक्तिगत विचार नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों पर चल रहा एक सुनियोजित एजेंडा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस एजेंडे पर तुरंत स्पष्टीकरण देने की मांग की। “शिक्षा व्यवस्था को बनाया जा रहा राजनीतिक प्रयोगशाला”
जम्बाल के अनुसार, बोर्ड अध्यक्ष वही बोल रहे हैं जो मुख्यमंत्री सुक्खू अपने मन में छिपाकर बैठे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के इशारे पर अब शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाया जा रहा है। उन्होंने डॉ. शर्मा के बयान को किसी शिक्षा संस्थान के प्रमुख का नहीं, बल्कि एक कट्टर कांग्रेस कार्यकर्ता का बयान बताया। “गांधी परिवार को खुश करने के लिए शिक्षा का दुरुपयोग”
राकेश जम्बाल ने कहा कि सुक्खू सरकार शिक्षा को कांग्रेस का चापलूसी केंद्र बना रही है ताकि गांधी परिवार और शीर्ष नेतृत्व को खुश किया जा सके। उन्होंने इसे हिमाचल के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। “शिक्षा बोर्ड को कमजोर करने की साजिश”
जम्बाल ने मुख्यमंत्री सुक्खू पर आरोप लगाया कि वे शिक्षा बोर्ड को प्रभावी बनाने के बजाय उसे कमजोर कर रहे हैं और स्कूलों को जबरन सीबीएसई में बदलने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड की कार्यप्रणाली को सशक्त करने के बजाय उसे राजनीतिक मोहरा बनाया जा रहा है। “राजनीतिक सौदेबाजी के तहत हो रही नियुक्तियाँ”
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि टिकट कटने के बाद की गई कई नियुक्तियाँ राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा हैं, जहाँ योग्यता नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत एजेंडा और गांधी परिवार की सेवा ही प्रमुख योग्यता बन गई है।

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