कांकेर जिले के कुरालठेमली गांव में पास्टर, पादरियों और धर्मांतरित व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए एक बोर्ड लगाया गया है। यह कांकेर जिले का 15वां गांव है, जहां इस तरह का प्रतिबंध लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव पांचवीं अनुसूची के दायरे में आता है, जहां पेसा अधिनियम 1996 लागू है। नियम 4(घ) के तहत उन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान और रूढ़िवादी संस्कृति के संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। ग्रामीणों के अनुसार, आदिवासियों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना उनकी सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचाता है और आदिम संस्कृति के लिए खतरा है। इसी खतरे को भांपते हुए बाहर से आने वाले धर्मांतरित व्यक्तियों के प्रवेश और उनके धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाई गई है। प्रस्ताव का उल्लंघन पर होगी कार्रवाई ग्राम सभा ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ग्राम के प्रस्ताव का उल्लंघन किया जाता है, तो ग्राम सभा में कार्रवाई की जाएगी और इसकी सूचना थाना-तहसील में दी जाएगी। बोर्ड लगाने के दौरान सरपंच कचहरी बाई, उपसरपंच शीशपाल ठाकुर सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। कुड़ाल गांव में लगा था पहला बोर्ड छत्तीसगढ़ में पहला ऐसा बोर्ड कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के कुड़ाल गांव में ग्राम सभा के प्रस्ताव के बाद लगाया गया था। इसके बाद परवी, जनकपुर, भीरागांव, घोडागांव, जुनवानी, हवेचुर, घोटा, घोटिया, सुलंगी, टेकाठोडा, बांसला, जामगांव, चारभाठा और मुसुरपुट्टा सहित 14 अन्य गांवों में भी इसी तरह के बोर्ड लगाए जा चुके हैं। अब नरहरपुर ब्लॉक का कुरालठेमली 15वां गांव बन गया है।


