स्कूल शिक्षा विभाग ने 35 साल की सेवा पूरी कर चुके करीब 600 लेक्चरर और प्राचार्य को पिछले साल चौथे वेतनमान का लाभ दे दिया। जब शिक्षक (प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक, प्रधानाध्यापक और उच्च श्रेणी शिक्षक) की बारी आई, तो लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों को सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ आने की चिंता सताने लगी। यही कारण है कि प्रदेश के करीब 2 हजार शिक्षकों (35 साल की सेवा पूरी कर चुके) को चौथा समयमान देने के आदेश 1 साल बाद भी जारी नहीं हो पाए हैं। यह हालात तब हैं जब सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग जुलाई 2023 में इसकी मंजूरी दे चुका है। दो माह से फाइल संचालनालय में चैंबर-दर-चैंबर घूम रही है। यह मामला प्रदेश के 2.50 लाख शिक्षकों से जुड़ा है। सरकार, 35 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान देने के आदेश जारी कर चुकी है। मप्र शिक्षक संघ का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने इस आदेश का पालन सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों के लिए किया। जिनका वेतन डेढ़ से 2 लाख रुपए माह है, जिन्हें चौथे समयमान में प्रति माह 8 से 12 हजार रुपए का लाभ हो रहा है। जिन शिक्षकों के वेतन में प्रति माह 3 से 4 हजार रुपए की वृद्धि होना है, उनके आदेश जारी नहीं किए जा रहे हैं। समयमान वेतनमान स्वीकृति की फाइल संचालनालय में ही घूम रही है। संघ को उम्मीद है कि जल्द इसके आदेश जारी हो सकते हैं। संघ के अध्यक्ष डॉ.क्षत्रवीर सिंह राठौर कहते हैं कि विभाग हमेशा सहायक शिक्षकों, उच्च श्रेणी शिक्षकों, प्रधानाध्यापक एवं नवीन शिक्षक संवर्ग के साथ ही किंतु-परंतु की स्थिति निर्मित कर नीतिगत निर्णयों में देरी करता है। यह समझ से परे है। जबकि यही लाभ लेक्चरर-प्राचार्य को दिया जा रहा है, उन्हें तो शिक्षकों की तुलना में हर माह ज्यादा राशि देना पड़ रही है।


