दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सर्वे और भूमि अधिग्रहण, बरवाडीह चिरमिरी लाइन आज तक नही हुई पूरी
यह रेल मार्ग बदल सकती है क्षेत्र की तकदीर
अनूपपुर। 85 साल पहले बरवाडीह से चिरमिरी तक लगभग 202 किलोमीटर लंबी रेल लाइन दूसरे विश्वयुद्ध का बिगुल बजने के बाद महज सर्वे और भूमि अधिग्रहण के बाद जस की तस छोड़ दी गयी थी। अब एक बार फिर इसमें जान डालने के लिए नए बजट में सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। यदि इस रेल लाइन पर जोर लगाकर काम करवा लिया जाए तो इससे न केवल मध्यप्रदेश बल्कि छत्तीसगढ़ और झारखंड के पिछड़े इलाकों के विकास का नया रास्ता खुल सकता है, बल्कि व्यापारिक क्षेत्र में भी यह रेल मार्ग फायदेमंद साबित हो सकता है। अभी सिर्फ सर्वे के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन लाभान्वित होने वाले तीन राज्य और उनके जनप्रतिनिधि यदि इसके महत्व को समझते हुए लामबन्द होकर प्रयास करते हैं तो कुछ सालों में ही यह रेल लाइन रेल मार्ग का नक्शा बदल सकती है। रेल मंत्री ममता बैनर्जी ने 2010-11 के रेल बजट में बरवाडीह-चिरमिरी सहित सौ से अधिक रेल लाइनों के सर्वे के निर्देश दिए हैं। बाकी रेल लाइनों से जहां देश के दूसरे स्थानों को लाभ मिलेगा तो वहीं बरसों पुरानी इतिहास का हिस्सा बन चुकी बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन को फिर से आबाद करने की कवायद शुरू हो तो क्षेत्र का परिदृश्य बदल जाएगा। अस रेल लाइन से आने वाले कल में अनूपपुर से रेल यात्रा और मालढुलाई आज से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी। देश के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के लिए यह नया रेल मार्ग विकास का मार्ग बन सकता है और इन तीनों राज्यों में खनिज की प्रचुरता के कारण फायदे का सौदा हो सकता है।
इस रेल लाइन का इतिहास
बरवाडीह झारखंड में है और चिरमिरी छत्तीसगढ़ में वर्ष 1925 में ब्रिटिश काल के दौरान अंग्रेजों ने इस रेल लाइन के महत्व को बखूबी समझा था और बरवाडीह व चिरमिरी के बीच रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया था मगर द्वितीय विश्व युद्ध का बिगुल बज जाने के कारण इस महत्वपूर्ण रेल लाइन का काम बंद कर दिया गया। इस रेल लाइन का मकसद खनिज परिवहन को आसान बनाना था। अंग्रेजों ने इस लाइन के लिए जमीन का अधिग्रहण भी करा लिया था। मगर दुर्भाग्य से काम बीच में ही रोक देना पड़ा। अब रेल मंत्री ममता बैनर्जी ने 85 साल पुरानी इस महती योजना को फिर से जिंदा करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इस रेल बजट में बरवाडीह और चिरमिरी रेल लाइन का सर्वे कराने के निर्देश दे दिए हैं। इस पर काम कब शुरू होगा और कब तक पूरा होगा और इसके लिए कुल कितना बजट तय किया गया है इसकी अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
मुम्बई कलकत्ता की दूरी होंगी कम
बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन के कारण देश के दो मेट्रो शहरों कलकत्ता और मुम्बई के बीच की दूरियां भी घट जाएंगी और आवागमन के लिए रेलगाड़ियां बढ़ जाएंगी। बरवाडीह और चिरमिरी रेल लाइन का काम पूरा होने के बाद देश के रेल मार्ग का नक्शा बदल जाएगा। जानकारों के मुताबिक दूरियां कम होने के कारण रेलवे स्टेशन भी बदलेंगे और तब हावड़ा से मुम्बई के बीच जबलपुर तक आने के लिए लतेहर, धनबाद, जबलपुर मुख्य स्टेशन हो सकते हैं। तत्कालीन परिस्थितियों को देखते हुए इनमें आमूलचूल परिवर्तन भी किए जा सकते हैं। इस पुराने सपने को साकार करने के लिए अंग्रेजों द्वारा प्रस्तावित 85 बरस पुरानी रेल लाइन को बिंदा करने के प्राथमिक प्रयास शुरू कर दिये गये हैं। यह बात अलग है कि प्रस्तावित रेल लाइन के पूर्ण होने में वर्षों लगेंगे लेकिन जब भी यह रेल लाइन चालू होती तो नक्ख ही बदल जाएगा।
खनिज परिवहन होगा आसान
इसके अलावा बरवाडीह और चिरमिरी में उपलब्ध खनिज संसाधनों में कोयला प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। मध्यप्रदेश के ताप विद्युत गृहों में आए दिन कोयले की कमी बनी रहती है। इस रेल लाइन के कारण यह कमी भी समय पर पूरी होगी और कोयला सीधे ताप विद्युत गृहों तक आसानी से पहुंच सकेगा। बरवाडीह और चिरमिरी में खनिज सम्पदा का अथाह भंडार है। अभी आवागमन के सुलभ साधन न होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। नई रेल लाइन बन जाने के बाद यहां से कोयले का सीधा सीधा परिवहन होगा और जरूरत की जगहों पर पहुंच जाएगा।


