टीकमगढ़ में बुधवार को संविधान दिवस के मौके पर कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक कार्यक्रम हुआ। इस दौरान संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन हुआ, साथ ही संविधान पर आधारित एक फिल्म और प्रदर्शनी का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन किया। यह आयोजन संविधान के महत्व और उसके आदर्शों को याद करने के लिए किया गया था। आज के दिन हुआ था संविधान निर्माण अपर कलेक्टर शिवप्रसाद मंडराह ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा के सदस्यों ने भारत के संविधान का निर्माण कार्य पूरा किया था। इसी दिन हम भारत के लोगों ने अपने संविधान को अपनाया था। मंडराह ने आगे बताया कि स्वाधीनता के बाद संविधान सभा ने भारत की अंतरिम संसद के रूप में भी काम किया। उन्होंने संविधान को हमारी राष्ट्रीय अस्मिता की पहचान बताया और कहा कि यह औपनिवेशिक पहचान को त्यागकर राष्ट्रवादी भावना के साथ आगे बढ़ने का मार्गदर्शक ग्रंथ है। युवाओं को संवैधानिक आदर्शों के बारे में बताने पर दिया जोर अपर कलेक्टर ने भारतीय न्याय संहिता का भी उल्लेख किया, जिसे दंड के स्थान पर न्याय की भावना पर आधारित बताया। मंडराह ने कहा कि आज पूरा देश भारतीय लोकतंत्र के आधार, हमारे संविधान और उसके निर्माताओं के प्रति आदर व्यक्त कर रहा है। उन्होंने सामूहिक स्तर पर संविधान में आस्था व्यक्त करने, युवाओं को संवैधानिक आदर्शों से अवगत कराने और संविधान सभा में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करने पर जोर दिया। इस मौके पर संयुक्त कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह, डिप्टी कलेक्टर एसके तोमर सहित अन्य संबंधित अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।


